चीन का दुनिया का सबसे ऊंचा डैम तैयार, ब्रह्मपुत्र नदी के बहाव पर मंडराया भारत के लिए खतरा

चीन ने शुआंगजियांगकोउ में दुनिया का सबसे ऊंचा हाइड्रो पावर स्टेशन बनाकर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है, जिसे लेकर भारत और बांग्लादेश की चिंताएं बढ़ गई हैं।

चीन ने स्थापित किया इंजीनियरिंग का नया कीर्तिमान

चीन ने ऊर्जा क्षेत्र में एक विशाल उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया का सबसे बड़ा और ऊंचा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत में स्थित शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन की पहली जनरेटिंग यूनिट को शुक्रवार को मुख्य पावर ग्रिड के साथ एकीकृत कर दिया गया है। इस कदम के साथ ही दुनिया के सबसे ऊंचे बांध से व्यावसायिक स्तर पर बिजली का उत्पादन भी शुरू हो गया है। इस परियोजना की कुल क्षमता 20 लाख किलोवॉट है। जब यह पूरी तरह से अपनी कार्यक्षमता के साथ संचालित होगा, तो इससे सालाना औसतन 7.7 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन होने की उम्मीद है। यह विशाल बांध 315 मीटर की ऊंचाई के साथ दुनिया में सबसे ऊंचा होने का गौरव प्राप्त कर चुका है।

दुनिया के इस सबसे ऊंचे बांध की प्रमुख विशेषताएं

शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन न केवल अपनी ऊंचाई के लिए, बल्कि अपनी इंजीनियरिंग क्षमताओं के लिए भी चर्चा में है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • इस बांध की ऊंचाई 315 मीटर है और इसकी कुल क्षमता 20 लाख किलोवॉट है, जो हर साल 7.7 अरब यूनिट बिजली उत्पन्न करेगी।
  • यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यांग्त्जे नदी के ऊपरी जलक्षेत्र में बाढ़ के प्रभाव को नियंत्रित करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।
  • इसके निर्माण में 4.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से अधिक सामग्री का उपयोग किया गया है। यह मात्रा इतनी अधिक है कि इतनी निर्माण सामग्री से पूरी पृथ्वी की भूमध्य रेखा के चारों ओर 1 मीटर ऊंची दीवार खड़ी की जा सकती है।
  • यह बांध ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करेगा और पारंपरिक कोयला आधारित ईंधनों पर निर्भरता को कम करने में सहायक होगा।
  • नदी के बहाव को नियंत्रित करने की क्षमता होने के कारण यह जल प्रबंधन और आपदा प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

परियोजना की लागत और भव्यता

इस मेगा प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य जुलाई 2025 में शुरू हुआ था। इस विशालकाय बांध को तैयार करने में अनुमानित 168 अरब डॉलर की भारी-भरकम धनराशि खर्च की गई है। अपनी अद्वितीय बिजली उत्पादन क्षमता और विशाल आकार के कारण यह वर्तमान में संचालित दुनिया की अन्य सभी जल-विद्युत परियोजनाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

भारत के लिए क्यों बन रहा है चिंता का विषय?

चीन की इस मेगा परियोजना ने भारत और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बांध के जरिए चीन के पास यारलुंग त्सांगपो नदी के जल प्रवाह को अपनी मर्जी से नियंत्रित करने की शक्ति आ जाएगी। भारत में इसे एक तरह के वॉटर बम के रूप में देखा जा रहा है। ज्ञात हो कि यारलुंग त्सांगपो नदी भारत में प्रवेश करते ही ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है और बांग्लादेश में इसे जमुना कहते हैं। यह नदी अरुणाचल प्रदेश और असम के लाखों लोगों की जीवन रेखा है। जिस स्थान पर यह बांध बना है, वह यारलुंग त्सांगपो ग्रैंड कैन्यन के समीप है, जहां नदी अत्यधिक वेग से नीचे गिरती है और घुमावदार रास्ते से होते हुए भारत में प्रवेश करती है, जिससे निचले इलाकों में भू-राजनीतिक चिंताएं उत्पन्न हो रही हैं।

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