मुरादाबाद में ग्वार की खेती का बदलता स्वरूप: सीड ड्रिल विधि से किसानों को होगा बंपर मुनाफा

मुरादाबाद के किसान अब वैज्ञानिक तरीके से ग्वार की खेती कर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने कम लागत में अधिक उपज प्राप्त करने के लिए सीड ड्रिल बुवाई और उर्वरक प्रबंधन के खास नुस्खे बताए हैं।

खेती के आधुनिक तौर-तरीके और ग्वार

मुरादाबाद जिले के किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर ग्वार की फसल की ओर रुख कर रहे हैं। ग्वार की खेती न केवल कम पानी में सफलतापूर्वक की जा सकती है, बल्कि यह रेतीली और दोमट दोनों प्रकार की मिट्टियों के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। यदि किसान उन्नत किस्मों का चुनाव करें, वैज्ञानिक विधियों जैसे बेड विधि और ड्रिप सिंचाई का प्रयोग करें और सही समय पर बुवाई करें, तो वे बहुत कम लागत में अपनी आमदनीवेश में शानदार आर्थिक मुनाफा कमा सकते हैं। ग्वार एक ऐसी फसल साबित हो रही है, जो बहुत ही कम समय के भीतर किसानों की जेब में अच्छा मुनाफा डाल सकती है।

सीड ड्रिल विधि है बुवाई के लिए सबसे कारगर

कृषि वैज्ञानिक डॉ दीपक मेहंदीरत्ता के अनुसार, ग्वार की फसल की बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए सीड ड्रिल या कतारबद्ध बुवाई (लाइन सोइंग) को सबसे बेहतरीन तकनीक माना जाता है। इस वैज्ञानिक विधि से बुवाई करने पर फसल की पैदावार में काफी वृद्धि देखने को मिलती है। जहाँ तक सही समय का सवाल है, किसान जून से जुलाई के मध्य तक इसकी बुवाई का काम कर सकते हैं। मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों के लिए जुलाई का पहला पखवाड़ा ग्वार की बुवाई के लिए सबसे अनुकूल माना गया है।

बुवाई के दौरान इन मानकों का रखें ध्यान

वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि अच्छी फसल पाने के लिए किसानों को कुछ प्रमुख मानकों का पालन करना चाहिए:

  • प्रति एकड़ खेत में बुवाई के लिए 8 से 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
  • दो कतारों के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी का पालन करना अनिवार्य है।
  • वहीं, पौधे से पौधे के बीच 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखनी चाहिए।
  • बीज को मिट्टी में लगभग 3 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना ही सबसे सही रहता है।

बुवाई के दौरान गहराई का खास ख्याल रखना पड़ता है। यदि बीज ज्यादा गहराई में चले जाएं, तो उनके अंकुरण में परेशानी आ सकती है और वे ठीक से जम नहीं पाते। इसलिए बीज की गहराई का सटीक प्रबंधन उत्पादन की सफलता की पहली सीढ़ी है।

खाद और उर्वरक का सही प्रबंधन

ग्वार की फसल से बंपर उत्पादन प्राप्त करने के लिए खाद और पोषण पर ध्यान देना आवश्यक है। प्रति एकड़ खेत में 4 से 5 टन अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद डालना अत्यंत लाभकारी होता है। चूँकि ग्वार को फास्फोरस की प्रचुर मात्रा की आवश्यकता होती है, इसलिए उर्वरक देते समय फास्फोरस पर विशेष जोर देना चाहिए। आवश्यकता महसूस होने पर वैज्ञानिक तरीके से स्प्रे (छिड़काव) का भी सहारा लिया जा सकता है। ग्वार एक दलहनी फसल है जो नाइट्रोजन फिक्सिंग का कार्य करती है, जिसके कारण इसमें नाइट्रोजन उर्वरक की अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती है।

आय में होगी उल्लेखनीय वृद्धि

इन वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर किसान प्रति एकड़ 5 से 8 कुंटल तक की पैदावार आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह फसल उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है जो कम पानी वाली परिस्थितियों में अपनी कृषि आय बढ़ाना चाहते हैं। सही नियोजन और आधुनिक यंत्रों के उपयोग से मुरादाबाद के किसान न केवल ग्वार की खेती को सफल बना रहे हैं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति में भी सुधार कर रहे हैं।

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