भारतीय परंपरा में पीपल को केवल एक साधारण वृक्ष नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खासतौर पर शनिवार के दिन पीपल की पूजा करने की रीत सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन पीपल के पेड़ में अनेक देवी-देवताओं का वास रहता है और विधि-विधान से इसकी आराधना करने पर शनि दोष, राहु-केतु से जुड़ी समस्याएं तथा जीवन की कई रुकावटें कम हो सकती हैं।
आज भी बड़ी संख्या में लोग हर शनिवार सुबह या शाम पीपल के पेड़ के पास दीपक प्रज्वलित करते हैं, जल चढ़ाते हैं और परिक्रमा लगाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे ग्रहों की अशुभ स्थिति को शांत करने का एक सहज उपाय माना गया है। ऐसा विश्वास है कि नियमित रूप से पीपल की पूजा करने पर न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि आर्थिक और पारिवारिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
ज्योतिष में पीपल वृक्ष का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पीपल का संबंध मुख्य रूप से शनि देव से जोड़ा जाता है। कई ज्योतिषाचार्यों का मत है कि जिन लोगों की कुंडली में शनि कमजोर स्थिति में हो, अथवा जिन पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही हो, उन्हें शनिवार के दिन पीपल की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
पीपल में देव शक्तियों का वास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और अनेक देव शक्तियों का निवास माना जाता है। यही कारण है कि इसकी पूजा को पुण्यदायी और शुभ फल प्रदान करने वाली बताया गया है।
पूजा से जुड़े मुख्य उपाय
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनिवार को पीपल की पूजा करना, उस पर जल अर्पित करना, सरसों के तेल का दीपक जलाना और पेड़ की परिक्रमा करना शनि दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है। इस उपाय को मानसिक शांति प्रदान करने, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और जीवन की बाधाओं को कम करने वाला बताया गया है।
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