दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों का नया दौर
दिल्ली सरकार ने राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों यानी ईवी की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026-30 का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है। दिल्ली में कुल प्रदूषण में वाहनों की भूमिका लगभग 23% के आसपास है, जिसे कम करने के लिए सरकार ने एक व्यापक योजना तैयार की है। यह नई पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से लागू की जाएगी, जिसके लिए सरकार ने लगभग 7,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
सब्सिडी का गणित: टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए लाभ
सरकार की इस नई नीति के तहत सब्सिडी का लाभ लेने के लिए वाहन का दिल्ली में पंजीकृत होना और खरीदार का दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है। सब्सिडी की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में भेजी जाएगी।
- इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर: पहले साल के दौरान बैटरी क्षमता के आधार पर 10,000 रुपये प्रति kWh के हिसाब से अधिकतम 30,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। दूसरे साल में यह राशि 20,000 रुपये और तीसरे साल में 10,000 रुपये तक सीमित रहेगी।
- इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर: इन्हें पहले साल 50,000 रुपये, दूसरे साल 40,000 रुपये और तीसरे साल 30,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
- रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन: 30 लाख रुपये तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 31 मार्च 2030 तक रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट दी जाएगी।
पुरानी गाड़ी हटाने पर मिलेगा स्क्रैपिंग इंसेंटिव
अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ियों (BS-IV या उससे पुरानी) को स्क्रैप करवाकर नई ईवी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए सरकार ने आकर्षक इनाम तय किए हैं। इस इंसेंटिव का लाभ लेने के लिए स्क्रैपिंग के 6 महीने के भीतर नई ईवी खरीदना आवश्यक है।
- इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर: 10,000 रुपये का स्क्रैपिंग इंसेंटिव।
- इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर: 25,000 रुपये का स्क्रैपिंग इंसेंटिव।
- इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर: 1 लाख रुपये तक का स्क्रैपिंग इंसेंटिव।
- इलेक्ट्रिक गुड्स व्हीकल: 50,000 रुपये तक का इंसेंटिव।
भविष्य के बड़े नियम: कब से बंद होंगी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां
दिल्ली सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध तरीके से कुछ कड़े नियम लागू करने की घोषणा की है।1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो का ही नया रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इसके बाद,1 अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के ही नए रजिस्ट्रेशन स्वीकार किए जाएंगे। साथ ही, सरकार ने 2030 तक स्कूल बसों के बेड़े में 30% हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक बसों की करने का लक्ष्य रखा है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाएं
ईवी अपनाने वालों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए सरकार ने पॉलिसी अवधि के दौरान कुल 23,000 नए ईवी चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा स्वैपेबल बैटरी स्टेशन, आसान फाइनेंसिंग सुविधा और सिंगल विंडो क्लियरेंस जैसे विकल्प भी दिए जाएंगे। इस पूरी योजना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए परिवहन मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि इसमें दिल्लीवासियों के हितों का पूरा ख्याल रखा गया है। वहीं बिजली मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि ईवी की संख्या बढ़ने के साथ-साथ बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया जाएगा। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इस नीति को वैज्ञानिक शोध के आधार पर तैयार किया गया है ताकि प्रदूषण स्तर में बड़ी कमी लाई जा सके।
अहम बातें जो आपको जाननी चाहिए
इस पॉलिसी की एक खास बात यह है कि ईवी खरीदने पर कोई कैप नहीं है, यानी यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे सभी पर लाभ मिलेगा। हाइब्रिड गाड़ियों को इस सब्सिडी दायरे से बाहर रखा गया है। परिवहन आयुक्त निहारिका ने जानकारी दी कि नीति का मुख्य फोकस व्यावसायिक वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकना है, इसीलिए एन1 ई-ट्रक पर भी 1 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन दिया गया है। सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस नीति के क्रियान्वयन के बाद दिल्ली की हवा पहले से काफी अधिक स्वच्छ होगी।
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