मानसून में यात्रा करने से पहले हो जाएं सावधान, इन जगहों पर जाने का जोखिम है सबसे ज्यादा

मानसून के दौरान पहाड़ों और तटीय इलाकों में घूमने का शौक आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकता है। भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं के खतरे को देखते हुए इन पर्यटन स्थलों से फिलहाल दूरी बनाए रखना ही बेहतर है।

भारत में पर्यटकों की संख्या में हाल के वर्षों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। लोग हर मौसम में घूमने के लिए उत्साहित रहते हैं, फिर चाहे वह कड़कड़ाती ठंड हो, भीषण गर्मी हो या फिर मानसून की रिमझिम फुहारें। बारिश के दिनों में पहाड़ों की हरियाली और धुंध भरी वादियां सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं, लेकिन अक्सर लोग इस दौरान होने वाले जोखिमों को नजरअंदाज कर देते हैं। हकीकत यह है कि मानसून में पहाड़ों की यात्रा करना जानलेवा साबित हो सकता है। इस मौसम में भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड, बाढ़, बादल फटने और रास्तों के अचानक कट जाने जैसी घटनाएं बहुत आम हैं। सुरक्षा के लिहाज से आपको मानसून के दौरान कुछ चुनिंदा जगहों पर जाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

मानसून में किन जगहों पर जाने से बचें?

मसूरी और उत्तराखंड: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश के समय लैंडस्लाइड का खतरा अत्यधिक बना रहता है। पहाड़ का मलबा अचानक सड़कों पर आ जाता है, जिससे पर्यटक घंटों तक फंस सकते हैं। इसके अलावा नदियों का जलस्तर भी इस मौसम में तेजी से बढ़ता है। उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे मसूरी, नैनीताल, केदारनाथ, बद्रीनाथ और जोशीमठ में बादल फटने की घटनाओं का डर बना रहता है, इसलिए यहां जाने का विचार अभी टाल देना ही समझदारी है।

कुल्लू मनाली: हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन की समस्या किसी से छिपी नहीं है। कुल्लू और मनाली जैसे मशहूर हिल स्टेशन के रास्ते अक्सर मलबे के कारण बंद हो जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कुल्लू, बिलासपुर और मनाली में बादल फटने से हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गवां बैठते हैं। इन हालातों में पर्यटकों के लिए इन स्थानों की यात्रा करना काफी चुनौतीपूर्ण और असुरक्षित हो सकता है।

दार्जिलिंग: अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध दार्जिलिंग मानसून में और भी हसीन हो जाता है, लेकिन यह खूबसूरती इस मौसम में आपके लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। बारिश के दौरान तीस्ता नदी का रौद्र रूप देखने को मिलता है। नदी का बहाव इतना तेज होता है कि वह अपने रास्ते में आने वाले पुलों, गांवों और सड़कों को बहा ले जाने में सक्षम होती है। साथ ही, भारी बारिश के चलते यहां लैंडस्लाइड से रास्तों का अवरुद्ध होना आम बात है।

वायनाड और केरल: मानसून के दौरान केरल की यात्रा करने से भी बचना चाहिए, विशेषकर वायनाड जैसे इलाकों में। यहां बाढ़ और समुद्री तूफानों का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। केरल की प्रमुख नदियां जैसे पेरियार, पम्बा, भारतपुझा और कबिनी उफान पर होती हैं, जिससे निचले इलाकों में हर साल बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

अन्य संवेदनशील क्षेत्र: मानसून में पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी जाने से बचें। असम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश के दौरान बाढ़ का प्रकोप हमेशा बना रहता है। इसके अतिरिक्त समुद्र तटीय इलाकों और मुंबई जैसे शहरों में भी अत्यधिक बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। जहां भी अधिक बारिश की संभावना हो, उन जगहों पर जाने से बचें।

ध्यान दें: मानसून में घूमने का आनंद लेने से पहले सुरक्षा को प्राथमिकता दें। खराब मौसम में किसी भी हिल स्टेशन या नदी किनारे वाले इलाकों में जाने से पहले स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी जरूर पढ़ें और अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें।

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