पुरी में आज भगवान जगन्नाथ की भव्य देव स्नान यात्रा, 108 कलशों से होगा महाभिषेक

ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज पुरी के श्रीक्षेत्र में भगवान जगन्नाथ की देव स्नान यात्रा धूमधाम से आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रभु 108 कलशों के जल से स्नान कर गजानन वेश में भक्तों को दर्शन देंगे।

आज भक्ति के रंग में डूबा है श्रीक्षेत्र पुरी

आज का दिन भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए अत्यंत विशेष है, क्योंकि आज पुरी में प्रसिद्ध देव स्नान यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। पूरा श्रीक्षेत्र भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर है। भगवान महाप्रभु की इस पावन यात्रा को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। लाखों की संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए हैं ताकि सभी भक्त शांतिपूर्ण ढंग से दर्शन का लाभ ले सकें।

108 कलशों से किया जाएगा महाभिषेक

धार्मिक परंपरा के अनुसार, स्नान यात्रा की शुरुआत गजपति महाराज द्वारा निभाई जाने वाली छेरा पहंरा रस्म के साथ होगी। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन का 108 कलशों के पवित्र और सुगंधित जल से महाभिषेक संपन्न होगा। कार्यक्रम की रूपरेखा के मुताबिक, स्नान विधि दोपहर 12 बजे से शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक पूरी की जाएगी। इसके बाद शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच प्रभु को उनके प्रसिद्ध हाथी वेश यानी गजानन वेश में सजाया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सिलसिला शाम 7:30 बजे से शुरू होकर रात 9:30 बजे तक चलेगा। अंत में रात 11 बजे से रात 2 बजे के बीच बाहुड़ा पहंडी की रस्म पूरी की जाएगी।

इस महा स्नान के लिए कलशों का विवरण कुछ इस प्रकार है:

  • भगवान जगन्नाथ के लिए 35 कलश
  • भगवान बलभद्र के लिए 33 कलश
  • देवी सुभद्रा के लिए 22 कलश
  • भगवान सुदर्शन के लिए 18 कलश

मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के समक्ष मानवीय लीलाएं प्रदर्शित करते हैं। जैसे मनुष्य अपने जीवन में जन्मदिन मनाते हैं, गर्मी में स्नान करते हैं या अस्वस्थ होने पर विश्राम करते हैं, वैसे ही भगवान भी इन लीलाओं के माध्यम से भक्तों के साथ जुड़ाव महसूस करते हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा और हाथी वेश का महत्व

ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ का जन्मोत्सव माना जाता है। इस दिन षोडशोपचार पूजा के बाद स्नान विधि पूर्ण होती है। स्नान के बाद भगवान के गजानन स्वरूप को देखने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। इस परंपरा के पीछे एक कथा प्रचलित है, जिसके अनुसार भगवान ने अपने भक्त गणपति भट्ट की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें हाथी के स्वरूप में दर्शन दिए थे। उसी दिन से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। इस विशेष वेशभूषा में भगवान जगन्नाथ को काले हाथी और भगवान बलभद्र को सफेद हाथी के रूप में सुसज्जित किया जाता है। माना जाता है कि स्नान यात्रा के दिन प्रभु के दर्शन अत्यंत कल्याणकारी और पुण्य प्रदान करने वाले होते हैं।

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