खंडवा के शुभम की सफलता की कहानी: उधार के पैसों से शुरू किया काम, आज 14 लोगों को दे रहे रोजगार

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के निवासी शुभम पटेल ने 12वीं के बाद नौकरी की तलाश में समय बर्बाद करने के बजाय अपना खुद का व्यवसाय चुना। आज वे अपने भोजनालय के जरिए न केवल लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि 14 लोगों को आजीविका भी दे रहे हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में रहने वाले शुभम पटेल ने यह साबित कर दिया है कि अगर मेहनत और सही सोच हो, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब शुभम के सामने करियर को लेकर कई चुनौतियां थीं और नौकरी के अवसर सीमित थे, तब उन्होंने हार मानने के बजाय खुद का रास्ता बनाने का साहस दिखाया। उस समय उनके पास पूंजी का अभाव था, जिसके कारण उन्होंने अपने मित्रों से पैसे उधार लेकर एक छोटी सी समोसा और कचौरी की दुकान शुरू की। शुरुआत का सफर कतई आसान नहीं था, क्योंकि संसाधन बहुत कम थे और बाजार में ग्राहकों का भरोसा जीतना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन शुभम ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मेहनत को जारी रखा।

भोजनालय और टिफिन सेवा की शुरुआत

समय के साथ लोगों को उनके हाथ से बने खाने का स्वाद पसंद आने लगा और उनके व्यवसाय का विस्तार होने लगा। अपनी समोसा-कचौरी की दुकान को सफलता के पायदान पर चढ़ता देख शुभम ने एक कदम और आगे बढ़ाया। उन्होंने एक भोजनालय की शुरुआत की और साथ ही साथ टिफिन सेंटर का काम भी शुरू कर दिया। इससे उनके व्यवसाय को नई मजबूती मिली। शुभम ने बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब वे अपनी असफलताओं को लेकर काफी तनाव में रहते थे। इसी दौरान सोशल मीडिया पर होटल व्यवसाय से संबंधित वीडियो और फूड ब्लॉग्स देखकर उन्हें अपने काम को बड़े स्तर पर ले जाने का विचार आया।

मरीजों और परिजनों के लिए बनी उम्मीद

शुभम के भोजनालय की सफलता के पीछे एक बड़ी वजह उनकी सामाजिक सोच है। खंडवा जिला अस्पताल के आसपास मौजूद मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को अक्सर किफायती और घर जैसा ताजा खाना नहीं मिल पाता था। शुभम ने इस समस्या को एक अवसर में बदल दिया और अस्पताल के पास ही दादाजी भोजनालय की स्थापना की। आज वहां आम लोगों के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिवार वाले भी बड़ी संख्या में भोजन के लिए आते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे मात्र 100 रुपये में अनलिमिटेड थाली उपलब्ध कराते हैं, जो बहुत ही लोकप्रिय हो रही है।

रोजगार का जरिया बना छोटा सा काम

शुभम का यह भोजनालय अब एक बड़े व्यावसायिक केंद्र के रूप में तब्दील हो चुका है। यहाँ नाश्ते में चाय, कॉफी, पोहा, समोसा और कचौरी जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रात के समय भी यह भोजनालय सेवा के लिए खुला रहता है ताकि किसी भी मरीज के परिजन को भूखा न रहना पड़े। शुभम की इस निरंतर सेवा भाव के कारण लोगों का उन पर भरोसा बढ़ता गया। आज उनके भोजनालय में करीब 13 से 14 लोग काम कर रहे हैं और नियमित रूप से वेतन प्राप्त कर रहे हैं। शुभम ने अपने छोटे भाई को भी समोसा-कचौरी की दुकान खुलवाकर आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है।

दूसरों के लिए प्रेरणा बने शुभम

एक समय था जब शुभम खुद नौकरी की तलाश में भटक रहे थे, लेकिन आज उन्हें इस बात का सबसे अधिक सुकून है कि वे दूसरों को रोजगार उपलब्ध करा पा रहे हैं। उनका मानना है कि दूसरों की मदद करने से जो आत्मसंतोष मिलता है, वह किसी भी अन्य चीज से कहीं अधिक है। शुभम पटेल की यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो कम संसाधनों के कारण अपने सपनों को सीमित कर लेते हैं। उनकी यात्रा दर्शाती है कि यदि इरादे नेक हों और मेहनत लगातार की जाए, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।

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