स्कूली पाठ्यक्रम में बॉलीवुड गानों का समावेश
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत ओडिशा में तैयार की गई नई स्कूली किताबों को लेकर विवादों का सिलसिला जारी है। हाल ही में आठवीं कक्षा के लिए प्रकाशित कला शिक्षा की पुस्तक 'कृति' ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इस किताब के भीतर बॉलीवुड फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' का बेहद लोकप्रिय गाना 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' पूरे बोलों के साथ छापा गया है। यह पहली बार है जब स्कूली शिक्षा के स्तर पर इस तरह के फिल्मी गीतों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है, जिसे लेकर आम लोगों और शिक्षाविदों में भारी असंतोष देखा जा रहा है।
लोक संगीत की जगह फिल्मी गानों को तरजीह
पाठ्यपुस्तक के 'मो संगीत जगत' नामक अध्याय में न केवल 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' को जगह मिली है, बल्कि इसी अध्याय में 'मिशन कश्मीर' फिल्म का गाना 'रिंद पोश माल' भी शामिल किया गया है। गौरतलब है कि 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' मूल रूप से एक पारंपरिक राजस्थानी लोकगीत है, जिसे 1999 में बॉलीवुड फिल्म के माध्यम से व्यापक प्रसिद्धि मिली थी। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि ओडिशा की स्कूली किताबों में राज्य की अपनी समृद्ध ओड़िया लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और शास्त्रीय धरोहर को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी, न कि बॉलीवुड के व्यावसायिक गानों को। सोशल मीडिया पर भी लोग इस चयन को लेकर मीम्स साझा कर रहे हैं और सरकार की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष कर रहे हैं।
1,678 गलतियों का पुराना विवाद
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब शिक्षा विभाग पहले से ही अपनी नई पाठ्यपुस्तकों में पाई गई 1,678 गंभीर गलतियों को लेकर भारी दबाव में है। इन पुस्तकों में व्याकरण की अशुद्धियों से लेकर तथ्यात्मक त्रुटियों और अनुचित सामग्री तक की भरमार थी। इन गलतियों के प्रकाश में आने के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया था और नई शिक्षा नीति के तहत तैयार की गई पुस्तकों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए थे।
सरकार की कार्रवाई और अधिकारियों पर गाज
बढ़ते विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूरे मामले का संज्ञान लिया और उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद लापरवाही के दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए। राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए 4 वरिष्ठ एससीईआरटी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जिनमें पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी और 3 सहायक निदेशक शामिल हैं। साथ ही, 6 अन्य अधिकारियों के विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है।
भविष्य के लिए कड़े निर्देश
जांच समिति ने स्थिति को सुधारने के लिए कुल 14 महत्वपूर्ण सिफारिशें सरकार को सौंपी हैं। इन सुझावों में एससीईआरटी के भीतर मास्टर एराटा रजिस्टर का रखरखाव करना, सभी छात्रों तक समय पर शुद्धिकरण सामग्री पहुंचाना और पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक अलग 'क्वालिटी एश्योरेंस सेल' का गठन करना प्रमुख है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी किताब की छपाई तब तक नहीं होगी जब तक कि उसमें भाषा, चित्रों, तथ्यों और गुणवत्ता के मानकों की पूरी तरह से समीक्षा न हो जाए। बहरहाल, 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' जैसे गीतों के शामिल होने से पाठ्यपुस्तक सुधार की पूरी प्रक्रिया फिर से एक बार सवालों के घेरे में आ गई है।
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