अजमेर में ब्रांडेड जूतों के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, गोदाम पर छापे में नकली लेबल का जखीरा बरामद

राजस्थान के अजमेर में नामी कंपनियों के नकली जूते-चप्पल बेचने के बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक गोदाम पर छापामार कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में फर्जी लेबल और ब्रांडेड जूतों की खेप जब्त की है।

अजमेर में नकली ब्रांडेड सामान का गोरखधंधा बेनकाब

राजस्थान के अजमेर शहर में नामी कंपनियों के नाम का सहारा लेकर आम जनता को ठगने का एक बड़ा मामला सामने आया है। अजमेर के क्लॉक टावर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे गोदाम पर धावा बोला है, जहां से बड़ी तादाद में नकली जूते और चप्पल बरामद किए गए हैं। इन उत्पादों पर फर्जी लेबल लगाकर इन्हें असली ब्रांड के तौर पर बाजार में खपाने की तैयारी की जा रही थी। इस कार्रवाई से स्थानीय बाजार में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गई है।

ब्रांडेड कंपनी की शिकायत पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई

इस पूरे मामले की जानकारी तब सामने आई जब एक नामी ब्रांडेड कंपनी की ओर से क्लॉक टावर थाना पुलिस को शिकायत दर्ज कराई गई। कंपनी ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर कहा था कि कुछ लोग उनके ट्रेडमार्क और नाम का गलत इस्तेमाल करके नकली उत्पाद बाजार में बेच रहे हैं, जिससे न केवल कंपनी की साख को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि ग्राहकों को भी ठगा जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बिना किसी देरी के एक विशेष टीम गठित की और चिन्हित गोदाम पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मौके पर पुलिस के साथ-साथ कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि भी मौजूद थे, ताकि नकली और असली उत्पादों की तत्काल पहचान की जा सके।

गोदाम में मिला फर्जीवाड़े का सामान

पुलिस जब गोदाम के भीतर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। वहां बड़ी संख्या में साधारण क्वालिटी के जूते और चप्पल रखे हुए थे। इन उत्पादों पर नामी कंपनियों के फर्जी स्टीकर और लेबल चिपकाने का काम किया जा रहा था। प्रतिनिधि ने मौके पर ही सामानों की बारीकी से जांच की और यह पाया कि ये सभी उत्पाद कंपनी के मानकों के विपरीत हैं। पुलिस ने इन सभी नकली जूतों और चप्पलों के साथ-साथ बड़ी संख्या में फर्जी लेबल और स्टीकर भी जब्त कर लिए हैं। ये बरामदगी इस बात का सबूत है कि अजमेर में बड़े स्तर पर ब्रांडेड नाम से नकली सामान बेचने का खेल चल रहा था।

कैसे ग्राहकों को बनाया जा रहा था शिकार

प्रारंभिक जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे काफी हैरान करने वाली हैं। आरोपी इन साधारण जूतों पर ऐसे हुबहू दिखने वाले लेबल लगाते थे कि एक सामान्य ग्राहक के लिए असली और नकली के बीच अंतर कर पाना लगभग नामुमकिन था। इन उत्पादों को बाजार में असली ब्रांड बताकर अधिक दामों पर बेचा जाता था। पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस तरह के नकली सामान अब तक बाजार में कितनी बड़ी मात्रा में पहुंच चुके हैं। इस पूरे मामले में कॉपीराइट एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। जांच का दायरा अब यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि सामान क्या था, बल्कि यह भी है कि ये जूते कहां बन रहे थे और इनकी सप्लाई किन-किन बाजारों में की जा रही थी।

पूरे नेटवर्क की तलाश में पुलिस

इस कार्रवाई के बाद शहर में नकली सामान बेचने वालों में खलबली मच गई है। क्लॉक टावर थाना पुलिस ने साफ कर दिया है कि वे केवल इस गोदाम तक ही सीमित नहीं रहेंगे। पुलिस का मुख्य उद्देश्य उस पूरी चेन को तोड़ना है जो इस अवैध व्यापार से जुड़ी हुई है। थानाधिकारी भिखाराम काला ने जानकारी दी कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को आपस में जोड़ने का प्रयास कर रही है। छापेमारी के दौरान जो भी दस्तावेज और जानकारियां पुलिस के हाथ लगी हैं, उनके आधार पर मामले से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आगामी दिनों में पुलिस अन्य स्थानों पर भी दबिश दे सकती है ताकि इस नकली कारोबार की जड़ों को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके। अभी जांच जारी है और आने वाले समय में मामले में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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