शिक्षा के लिए दो पीढ़ियों का महादान
शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे किसी भी समाज की दिशा और दशा बदली जा सकती है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत छपोराडीह में एक किसान परिवार ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। यहां एक साधारण किसान परिवार ने अपने निजी हितों से ऊपर उठकर आने वाली पीढ़ियों, विशेषकर बेटियों के उज्जवल भविष्य के लिए अपनी पैतृक जमीन दान कर दी है। इस परिवार के दो पीढ़ियों के त्याग और समर्पण की वजह से आज छपोराडीह और उसके आसपास के करीब 12 गांवों के बच्चे अपने ही क्षेत्र में रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में साक्षरता की एक नई लहर दौड़ गई है।
साढ़े तीन दशक पहले का संघर्ष
आज से करीब 35 साल पहले छपोराडीह गांव में बच्चों, खास तौर पर बेटियों के लिए पढ़ाई करना एक कठिन चुनौती हुआ करता था। गांव में स्कूल की सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों को पांचवीं या आठवीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए 15 किलोमीटर दूर पटेवा या तुमगांव की राह पकड़नी पड़ती थी। उस समय जंगल और पथरीले रास्तों के कारण माता-पिता अपनी बेटियों को इतनी दूर अकेले भेजने से कतराते थे। इस असुरक्षा और दूरी की मजबूरी के कारण अधिकांश लड़कियां प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद स्कूल छोड़ देती थीं और खेतों में मजदूरी करने के लिए विवश हो जाती थीं।
किसान दुलार सिंह पटेल की पहल
जब गांव में मिडिल स्कूल की मंजूरी तो मिली, लेकिन भवन निर्माण के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन का मिलना मुश्किल हो गया। सड़क किनारे कोई भी सरकारी जमीन खाली नहीं थी, जिसके कारण प्रशासन स्कूल को किसी दूसरे गांव जलकी में स्थानांतरित करने पर विचार करने लगा। इस संकट के समय गांव के किसान दुलार सिंह पटेल ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्हें लगा कि यदि स्कूल यहां से चला गया, तो उनके अपने गांव और आसपास के गरीब बच्चों के लिए शिक्षा के द्वार हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। उन्होंने बिना किसी संकोच के अपनी सड़क किनारे स्थित 1 एकड़ बेशकीमती निजी जमीन स्कूल भवन के निर्माण के लिए प्रशासन को दान कर दी। इस कदम के बाद गांव में स्कूल बना और शिक्षा का नया सवेरा हुआ।
बेटे लक्ष्मण पटेल ने भी बढ़ाई आगे की राह
पिता के संस्कारों को अपनाते हुए उनके सुपुत्र लक्ष्मण पटेल ने भी उसी राह पर चलते हुए समाज सेवा की एक नई मिसाल पेश की है। समय के साथ जब इस स्कूल को हाईस्कूल और उसके बाद हायर सेकेंडरी स्कूल के रूप में अपग्रेड किया गया, तो परिसर में खेल मैदान और अतिरिक्त कमरों के लिए जगह कम पड़ने लगी। ऐसे में लक्ष्मण पटेल ने आगे आकर अपनी साढ़े 87 डिसमिल निजी कृषि भूमि हायर सेकेंडरी स्कूल और खेल मैदान के विकास के लिए दान कर दी।
बदल गई अंचल की तस्वीर
इस परिवार द्वारा दान की गई भूमि के कारण आज यह स्कूल शिक्षा का बड़ा केंद्र बन चुका है। वर्तमान में इस विद्यालय में पहली कक्षा से लेकर बारहवीं तक के करीब 450 छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। इस सुविधा के कारण अब 10 से ज्यादा गांवों की बेटियां किसी भी डर के बिना सुरक्षित माहौल में पढ़ने आ रही हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच हीरालाल निषाद का कहना है कि इस पहल का ही परिणाम है कि आज गांव की 95 प्रतिशत बेटियां न केवल स्कूल शिक्षा ले रही हैं, बल्कि अपनी योग्यता के दम पर सरकारी नौकरियों में भी अपना स्थान बना रही हैं।
https://hindi.news18.com/news/chhattisgarh/mahasamund-chhoporadih-farmer-dular-singh-patel-laxman-patel-land-donation-girls-education-school-playground-history-local18-10612936.html