विवादों में सपा की नियुक्ति
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर समाजवादी पार्टी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। कानपुर में पार्टी ने लोहिया वाहिनी के जिला अध्यक्ष पद पर अमर सिंह यादव को मनोनीत किया है। यह नियुक्ति इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि अमर सिंह यादव पर साल 2023 में एक महिला के साथ छेड़छाड़ करने और उसे जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। इस फैसले के बाद से न केवल विपक्षी दल बल्कि सपा के भीतर भी कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता दबी जुबान से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
एफआईआर की सच्चाई
अमर सिंह यादव के खिलाफ दर्ज मामले की आधिकारिक एफआईआर की कॉपी मौजूद है, जिससे आरोपों की पुष्टि होती है। गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होने के बावजूद उन्हें संगठन में पद दिए जाने को लेकर पार्टी की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐसे व्यक्ति को अहम जिम्मेदारी सौंपना पार्टी की छवि के लिए घातक साबित हो सकता है।
तीन साल का सफर और सवाल
समाजवादी पार्टी ने घटना के महज तीन साल के भीतर अमर सिंह यादव को कानपुर ग्रामीण का जिलाध्यक्ष बनाकर पद पर आसीन कर दिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब राजनीतिक पार्टियां अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि महिला सुरक्षा के दावे करने वाली पार्टी का यह कदम उनकी कथनी और करनी में अंतर को दर्शाता है। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह मुद्दा विपक्षी दलों को समाजवादी पार्टी के खिलाफ महिलाओं और युवतियों को एकजुट करने का एक बड़ा अवसर दे रहा है।
अमर सिंह का पक्ष
जब इस मामले को लेकर अमर सिंह यादव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी बात रखी। हालांकि, पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर उपजी असंतोष की स्थिति अभी भी बरकरार है और आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। कानपुर की राजनीति में इस नियुक्ति ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या आपराधिक छवि वाले नेताओं को पार्टी में अहम पद दिए जाने चाहिए।
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