सियासत में नया विवाद
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय एक नई चर्चा का दौर शुरू हो गया है, जिसे 7 फीसदी बनाम 22 फीसदी की जंग के रूप में देखा जा रहा है। मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने अब यह सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि अगर महज 7 फीसदी आबादी वाले यादव समाज से मुख्यमंत्री बन सकता है, तो फिर 22 फीसदी की जनसंख्या हिस्सेदारी रखने वाले मुसलमान समुदाय से मुख्यमंत्री क्यों नहीं चुना जा सकता है।
मुसलमान नेतृत्व की बढ़ती मांग
इस मांग की शुरुआत मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की तरफ से की गई है, जिसके बाद एआईएमआईएम (AIMIM) ने भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाया है। यह स्थिति एमवाई यानी मुस्लिम और यादव समीकरण के भरोसे चलने वाले अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी मुश्किल का सबब बनती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की मांग पार्टी के पुराने वोट बैंक के संतुलन को बिगाड़ सकती है।
कांग्रेस का बचाव और आरोप
इस कठिन दौर में समाजवादी पार्टी को कांग्रेस के नेता इमरान मसूद का साथ मिला है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस पूरी बहस को एक साजिश करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जो भी लोग इस समय मुसलमान मुख्यमंत्री की मांग को हवा देने का काम कर रहे हैं, वे वास्तव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर काम कर रहे हैं और उसे फायदा पहुंचा रहे हैं।
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