राजस्थान में बीजेपी का मिशन पसमांदा, कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी

राजस्थान में आगामी चुनावों को देखते हुए बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा अगले महीने से 'मिशन पसमांदा' के जरिए प्रदेश की 40 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर अपना आधार मजबूत करेगा।

राजस्थान में बीजेपी का नया राजनीतिक दांव

राजस्थान की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी अब एक नई और रणनीतिक दिशा की ओर कदम बढ़ा रही है। आगामी पंचायत, निकाय और विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने मुस्लिम समाज के पिछड़े और वंचित तबके को साधने की योजना तैयार की है। पार्टी का अल्पसंख्यक मोर्चा अगले महीने यानी जुलाई से सूबे में मिशन पसमांदा नाम से एक बड़े अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। इस मिशन के जरिए भाजपा का मुख्य लक्ष्य कांग्रेस के उस कोर वोट बैंक में सेंधमारी करना है, जिसे अब तक वह अपने साथ नहीं जोड़ पाई थी।

40 विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान

राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से लगभग 40 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका में रहती है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की रणनीति अब उन इलाकों में जाकर पार्टी का विस्तार करने की है। भाजपा का मानना है कि राजस्थान में मुस्लिम राजनीति का नेतृत्व अब तक कुछ गिने-चुने लोगों के हाथों में ही सीमित रहा है, जबकि समाज का एक बड़ा और पिछड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व से आज भी वंचित है।

किन समुदायों तक पहुंच बनाएगी भाजपा

इस अभियान को लेकर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हमीद खान मेवाती ने जानकारी दी है कि पार्टी अब समाज के धरातल (ग्रास रूट) तक जाकर लोगों से संवाद करेगी। पार्टी का उद्देश्य उन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं। इस अभियान के तहत भाजपा विशेष रूप से इन समुदायों के बीच जाकर अपनी बात रखेगी:

  • मेव, कायमखानी और कुरैशी समाज
  • मंसूरी, मिरासी और देशवाली समुदाय
  • बोहरा और सिंधी मुसलमान
  • पठान और गद्दी मुसलमान

हमीद खान मेवाती का कहना है कि राजस्थान के कई जिलों में इन समुदायों का खासा प्रभाव है, जिनमें अलवर, भरतपुर, नागौर, टोंक, कोटा, सीकर, झुंझुनूं, बाड़मेर, जैसलमेर और अजमेर मुख्य रूप से शामिल हैं।

अशरफ बनाम पसमांदा का गणित

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का तर्क है कि देश के मुस्लिम समाज में एक स्पष्ट विभाजन देखा जा सकता है। मेवाती के अनुसार, कुल मुस्लिम आबादी में से लगभग 15 फीसदी उच्च वर्ग के माने जाते हैं, जिन्हें अशरफ कहा जाता है। शेष 85 फीसदी आबादी अरजाल और अजलाफ मुस्लिम समुदायों की है, जिन्हें पसमांदा कहा जाता है। ये लोग आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से काफी पीछे हैं और इन्हें आज तक राजनीति में पर्याप्त अवसर नहीं मिले हैं। पार्टी का मानना है कि यही वह वर्ग है जिसके विकास के लिए मोदी सरकार और राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने बिना किसी भेदभाव के काम किया है।

बूथ स्तर तक मजबूती की रणनीति

भाजपा की यह रणनीति केवल राजनीतिक रैलियों तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी संगठन की योजना है कि केंद्र और राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को सीधे इन पसमांदा परिवारों तक पहुंचाया जाए। बूथ स्तर पर इन योजनाओं का प्रचार किया जाएगा ताकि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत हो सके। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का स्पष्ट लक्ष्य है कि आगामी पंचायत और निकाय चुनावों से पहले पार्टी के लिए एक मजबूत जमीन तैयार की जाए।

जनसंख्या और राजनीतिक संदर्भ

वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस समय राजस्थान में कुल मुस्लिम आबादी लगभग 62.15 लाख दर्ज की गई थी, जो राज्य की कुल जनसंख्या का करीब 9.1% थी। वर्तमान में यह संख्या बढ़ने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि भाजपा का यह कदम कांग्रेस के उस वोट बैंक को हिलाने का प्रयास है जिसे वह अब तक अपना पारंपरिक आधार मानती रही है। भाजपा का नेतृत्व अब यह स्थापित करने में जुटा है कि समावेशी विकास का लाभ अंतिम छोर पर खड़े मुस्लिम व्यक्ति तक भी पहुंचा है और पार्टी का भविष्य का नेतृत्व अब इसी पसमांदा वर्ग से उभरकर सामने आएगा।

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