सिंहस्थ 2028: उज्जैन की सुरक्षा में बढ़ेगी ताकत, झाबुआ से आएंगे 11 खास घोड़े

सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियों के तहत मध्य प्रदेश पुलिस ने झाबुआ के प्रशिक्षित अश्वदल को उज्जैन स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है, जिससे महाकाल की नगरी में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन और भी अधिक पुख्ता होगा।

सिंहस्थ 2028 के लिए विशेष तैयारी

धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ 2028 महापर्व को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने का काम शुरू कर दिया है। करोड़ों की संख्या में देश-दुनिया से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी प्राथमिकता है। इसी दिशा में पुलिस मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वर्ष 1984 से झाबुआ में अपनी सेवाएं दे रहे पुलिस अश्वदल को उज्जैन स्थानांतरित करने का निर्देश जारी किया है। यह कदम भीड़ नियंत्रण, कानून व्यवस्था और अपराध रोकथाम के नजरिए से अत्यंत प्रभावशाली साबित होगा।

झाबुआ से उज्जैन का सफर

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सिंहस्थ की तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से झाबुआ पुलिस अश्वदल के 11 प्रशिक्षित घोड़ों को उज्जैन भेजा जा रहा है। इन घोड़ों के साथ-साथ उनके प्रबंधन और देखभाल के लिए करीब 18 पुलिसकर्मी भी उज्जैन पहुंचेंगे। उज्जैन पुलिस लाइन के आरआई रणजीत सिंह के अनुसार, वर्तमान में उज्जैन पुलिस के पास 10 प्रशिक्षित घोड़े पहले से तैनात हैं, जिनकी देखरेख के लिए 24 पुलिसकर्मी अलग-अलग शिफ्टों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। हालांकि, इनमें से 6 घोड़े उम्रदराज हो चुके हैं। झाबुआ से 11 नए घोड़ों के आने के बाद उज्जैन में प्रशिक्षित घोड़ों की कुल संख्या बढ़कर 21 हो जाएगी। इस पूरे दल के संचालन और रखरखाव के लिए भविष्य में 40 से अधिक जवान तैनात रहेंगे।

मौसम के अनुसार खास देखभाल

पुलिस विभाग अपने इन मूक सहयोगियों की देखभाल के लिए बेहद संजीदा रहता है। पशुओं के स्वास्थ्य और आराम के लिए मौसम के अनुकूल विशेष इंतजाम किए जाते हैं। गर्मियों के दौरान घोड़ों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए स्टेबल में कूलर और स्प्रिंकलर की व्यवस्था की जाती है, जबकि कड़ाके की ठंड में उन्हें गर्माहट देने के लिए विशेष हीटिंग उपकरणों का उपयोग किया जाता है। बारिश के मौसम में उनके लिए सुरक्षित और पूरी तरह से ढके हुए टीन शेड की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। इसके अलावा, मौसम को ध्यान में रखते हुए उनके टहलने और प्रशिक्षण के समय में भी नियमित बदलाव किए जाते हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी न हो।

शक्तिशाली खुराक और अनुशासन

इन घोड़ों की फुर्ती और ताकत बनाए रखने के लिए उनके खानपान का विशेष चार्ट तैयार किया गया है। हर एक घोड़े को प्रतिदिन संतुलित और पौष्टिक आहार दिया जाता है, जिसमें लगभग 2 किलो चना, 1.5 किलो जौ, 500 ग्राम चापड़ और करीब 11 किलो हरा चारा शामिल है। यह डाइट उनके अनुशासन और शारीरिक क्षमता को उच्च स्तर पर बनाए रखने में मदद करती है। आमतौर पर पुलिस बल में शामिल इन अश्वों की कार्यक्षमता का स्तर काफी ऊंचा होता है और उनकी औसत आयु 20 वर्ष या उससे अधिक रहती है।

भीड़ नियंत्रण में अश्वदल की भूमिका

पुलिस अश्वदल केवल सुरक्षा का हिस्सा नहीं है, बल्कि भीड़ प्रबंधन में यह सबसे प्रभावी हथियार माना जाता है। घोड़े पर सवार पुलिसकर्मी ऊंचाई से काफी दूर तक निगरानी रखने में सक्षम होते हैं, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखना और भीड़ को नियंत्रित करना आसान हो जाता है। उज्जैन में होने वाली बाबा महाकाल की सवारी, राष्ट्रीय पर्व, संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त, मोहर्रम के जुलूस और विभिन्न प्रकार की मॉकड्रिल में ये घोड़े हमेशा अग्रिम पंक्ति में तैनात रहते हैं। इनकी उपस्थिति न केवल अपराधियों में भय पैदा करती है, बल्कि यह आम नागरिकों और श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र भी बनी रहती है। सिंहस्थ 2028 में यह पूरा अश्वदल महाकाल की नगरी की सुरक्षा में एक नई और मजबूत कड़ी साबित होगा।

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