मजदूर के बेटे ने रचा इतिहास: बीपीएससी परीक्षा पास कर बने एसडीएम, गांव पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत

बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले धीरज कुमार ने कड़ी मेहनत से बीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की है। एसडीएम के पद पर चयनित होने के बाद जब वे अपने गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।

संघर्षों को मात देकर हासिल की कामयाबी

बिहार के गोपालगंज जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके का मान बढ़ा दिया है। जिले के थावे प्रखंड स्थित सहबजवां गांव के रहने वाले धीरज कुमार ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 202वीं रैंक हासिल की है। इस सफलता के साथ ही धीरज अब एसडीएम के पद पर अपनी सेवाएं देंगे। जब वे अपनी सफलता के बाद पहली बार गांव लौटे, तो ग्रामीणों ने उन्हें पलकों पर बिठा लिया। ढोल-नगाड़ों की थाप और फूलों की वर्षा के बीच गांव के लोगों ने उनका स्वागत किसी बड़े जननायक की तरह किया। इस दौरान वहां मौजूद लोग खुशी में झूमते और जश्न मनाते नजर आए।

आर्थिक तंगियों से लड़कर पूरा किया सपना

धीरज की यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके कठिन संघर्ष की एक मिसाल है। उनके पिता धर्मेंद्र पंडित विदेश में रहकर मजदूरी करते हैं, ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। वहीं उनकी मां एक गृहिणी हैं। तीन भाइयों में सबसे बड़े धीरज ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद पंजाब से बीटेक की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा पूरी होने के बाद उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज सेवा करने का दृढ़ संकल्प था।

नौकरी के साथ जारी रखी पढ़ाई

आर्थिक तंगियां धीरज के सपनों के आड़े नहीं आ सकीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बेंगलुरु में क्लर्क के पद पर नौकरी शुरू कर दी। एक निजी कंपनी में काम करने के बावजूद उन्होंने अपने प्रशासनिक अधिकारी बनने के लक्ष्य को कभी ओझल नहीं होने दिया। ऑफिस की थकान और जिम्मेदारियों के बाद भी वे रोजाना कड़ी मेहनत के साथ बीपीएससी की तैयारी करते रहे। सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनकी अटूट जिद और निरंतरता आखिरकार रंग लाई और उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

बदलाव लाना है मुख्य लक्ष्य

अपनी इस बड़ी उपलब्धि के बाद धीरज कुमार ने अपने भविष्य के उद्देश्यों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि एसडीएम के तौर पर उनकी प्राथमिकता सरकारी योजनाओं को समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने आगे कहा, एसडीएम के रूप में मेरा मुख्य फोकस समावेशी विकास को बढ़ावा देना और समाज के हर वर्ग तक सरकारी लाभ सुनिश्चित करना होगा। मैं जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव लाकर आम जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहता हूं।

युवाओं के लिए मिसाल बने धीरज

धीरज की यह कहानी उन हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है जो आर्थिक तंगी या अभावों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत करने का जुनून हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी यह कामयाबी अब उनके पूरे गांव और क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गई है।

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