पुणे: 3 साल की बच्ची से दरिंदगी करने वाले 65 साल के बुजुर्ग को मिली फांसी, 2 महीने के भीतर न्याय

पुणे के नसरपुर गांव में तीन साल की मासूम के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए 65 वर्षीय आरोपी को फांसी की सजा दी है। यह फैसला घटना के मात्र दो महीने के भीतर आया है, जिसकी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सराहना की है।

फांसी की सजा से न्याय की उम्मीद

पुणे में तीन साल की एक मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और बेरहम हत्या के मामले में कोर्ट ने महज 2 महीने के भीतर फैसला सुनाते हुए दोषी को मौत की सजा दी है। पुणे की विशेष अदालत ने 65 साल के भीमराव कांबले को इस घिनौनी वारदात के लिए फांसी पर लटकाने का आदेश दिया है। यह दिल दहला देने वाली घटना 1 मई, 2026 को पुणे जिले के नसरपुर गांव में हुई थी। अदालत ने अपने सख्त फैसले में कहा कि यह अपराध अत्यंत क्रूर श्रेणी का है और अपराधी को किसी भी प्रकार की नरमी का हक नहीं है।

मुख्यमंत्री और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस ऐतिहासिक फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संतोष जताया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि समाज में ऐसे हैवानों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने इस त्वरित न्याय के लिए न्यायालय का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्तिगत रूप से पुणे के पुलिस अधीक्षक और सरकारी वकील अजय मिसर को फोन करके बधाई दी और रिकॉर्ड समय में इस मामले को सुलझाने के लिए जांच टीम की सराहना की। दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता भास्कर जाधव ने सजा का स्वागत किया और मांग की कि इस फांसी की सजा को जल्द से जल्द क्रियान्वित किया जाना चाहिए।

घटना का विवरण

आरोपी बुजुर्ग ने 1 मई को उस बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया था। आरोपी बच्ची को बहला-फुसलाकर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने क्रूरता की हदें पार करते हुए पत्थर से बच्ची का सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी। अपराध के सबूतों को नष्ट करने के मकसद से आरोपी ने शव को तबेले में गोबर के ढेर के नीचे छिपाने का प्रयास किया था। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज में आरोपी को बच्ची के साथ जाते हुए साफ तौर पर देखा गया था, जिसके आधार पर उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया था।

राष्ट्रीय महिला आयोग की सख्त टिप्पणी

इस जघन्य वारदात ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त था। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और इसे अत्यंत वीभत्स और शर्मनाक करार दिया। आयोग ने कहा कि यह घटना न केवल जघन्य अपराध है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने National Commission for Protection of Child Rights को पत्र लिखकर मामले की निगरानी करने और दोषी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया था। अंततः, फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के माध्यम से इस केस में पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।

https://www.indiatv.in/maharashtra/pune-65-year-old-man-raped-3-year-old-girl-crushed-her-head-with-stone-sentenced-to-death-within-two-months-2026-06-29-1228015