तीन दशक से अधिक समय के बाद ऐतिहासिक समाधान
राजस्थान और हरियाणा के बीच पिछले 32 साल से चल रहे यमुना जल विवाद का अब आधिकारिक तौर पर निपटारा हो गया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत दोनों पड़ोसी राज्यों ने जल संकट के स्थाई समाधान के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी MOA पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
समझौते की मुख्य विशेषताएं
इस ऐतिहासिक करार के तहत दोनों राज्य सरकारों ने यमुना के पानी के बंटवारे पर सहमति व्यक्त की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस समझौते के अंतर्गत 33379 क्यूसेक पानी के आवंटन पर मुहर लगाई गई है। यह कदम राज्य के उन इलाकों में पेयजल और सिंचाई की किल्लत को दूर करने के लिए उठाया गया है जो लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे थे।
परियोजना का भविष्य और कार्ययोजना
समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन 3 में पूरी की गई। इस जल समझौते के क्रियान्वयन के लिए धरातल पर एक बड़ी बुनियादी परियोजना शुरू की जाएगी। योजना के तहत राजस्थान और हरियाणा के बीच कुल 300 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस पाइपलाइन के जरिए यमुना का पानी निर्धारित मात्रा में राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा, जिससे सीमावर्ती जिलों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। दशकों पुराने इस गतिरोध के खत्म होने से दोनों राज्यों के बीच जल सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।
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