मामले में नहीं मिली कोई राहत
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बार फिर अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर तेजी से सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। सोमवार को अदालत की एकल पीठ ने साफ कर दिया कि इस मामले में कोई विशेष तत्परता दिखाने की आवश्यकता नहीं है और सुनवाई तय नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।
क्या है पूरा घटनाक्रम
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने 23 जून को कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष एक याचिका दाखिल की थी। इस याचिका के माध्यम से उन्होंने आंखों के उपचार हेतु सात दिनों के लिए विदेश यात्रा करने की अनुमति मांगी थी। इसके साथ ही, उन्होंने अदालत से यह आग्रह किया था कि उनकी इस अर्जी पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाए। हालांकि, अदालत ने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया।
इससे पूर्व 24 जून को भी जस्टिस भट्टाचार्य की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इस मामले में तत्काल सुनवाई करने का कोई उचित कारण नहीं दिखता है। अदालत ने उस समय भी यही रुख अपनाया था कि सुनवाई सामान्य कानूनी प्रक्रिया और नियमों के तहत ही संपन्न होगी। सोमवार को जब अभिषेक बनर्जी के वकीलों ने पुनः उसी एकल पीठ के सामने इस मुद्दे को उठाते हुए शीघ्र सुनवाई की मांग की, तो न्यायाधीश ने इसे फिर से खारिज कर दिया। अदालत का स्पष्ट निर्देश है कि मामले की सुनवाई केवल तय कॉज लिस्ट के अनुसार ही होगी।
सीआईडी जांच और अदालती शर्तें
अभिषेक बनर्जी के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे वर्तमान में एक कानूनी दायरे में बंधे हुए हैं। हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट की एक अन्य एकल पीठ ने निर्देश दिया था, जिसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी टीम ने सिग्नेचर मिसमैच मामले की जांच के संबंध में अभिषेक बनर्जी से दो बार पूछताछ भी की है। यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी पदों पर नियुक्तियों के लिए पेश किए गए एक प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें कुछ टीएमसी विधायकों ने दावा किया था कि उनके हस्ताक्षर जाली किए गए थे।
उस दौरान न्यायाधीश कौशिक चंदा की एकल पीठ ने अभिषेक बनर्जी को पुलिस की कठोर कार्रवाई के विरुद्ध अंतरिम राहत प्रदान की थी। हालांकि, यह सुरक्षा कवच कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ दिया गया था। इन शर्तों में से एक मुख्य शर्त यह है कि अभिषेक बनर्जी बिना अदालत की पूर्व अनुमति लिए देश से बाहर यात्रा नहीं कर सकते हैं। इसी कानूनी प्रतिबंध के कारण उन्हें इलाज के लिए अदालत से अनुमति मांगनी पड़ रही है।
पुरानी चोट का है मामला
अभिषेक बनर्जी की आंखों की समस्या के पीछे का कारण अक्टूबर 2016 की एक दुर्घटना बताई जाती है। उस समय वे मुर्शिदाबाद जिले में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम से कोलकाता वापस लौट रहे थे, तभी वे एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इस हादसे में उनकी आंख में गंभीर चोटें आई थीं। उस समय उन्होंने भारत के कई बड़े अस्पतालों में अपना इलाज करवाया था, जिसके बाद उन्हें आगे के उपचार के लिए विदेश जाने की आवश्यकता पड़ी थी। अब उसी पुरानी चोट के सिलसिले में वे एक बार फिर विदेश जाकर इलाज करवाना चाहते हैं।
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