संघर्ष से सफलता का सफर
नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र के निवासी गोपाल डूडी की कहानी उन लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत हार जाते हैं। कोरोना महामारी के दौर में जब बड़े स्तर पर लोगों की नौकरियां जा रही थीं, गोपाल डूडी भी उनमें से एक थे जिनकी आजीविका का साधन छिन गया था। शहर में नौकरी छूटने के बाद उन्होंने वापस अपने गांव लौटने का फैसला किया।
नई राह और चुनौतियों का सामना
गांव लौटने के बाद उन्होंने खेती को ही अपना मुख्य आधार बनाने की ठानी। पारंपरिक फसलों से हटकर उन्होंने चिया सीड्स की खेती करने का साहसी कदम उठाया। हालांकि, शुरुआत हमेशा आसान नहीं होती। गोपाल को शुरुआती दौर में कई चुनौतियों और विफलताओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत किस्म के बीजों का सहारा लिया।
खेती में तकनीक का जादू
गोपाल डूडी ने अपने अनुभव और मेहनत के दम पर आज 60 बीघा भूमि पर चिया सीड्स की फसल लहलहा दी है। उन्होंने आधुनिक खेती के तौर तरीकों को अपनाकर शानदार उत्पादन हासिल किया है। उनकी यह मेहनत अब रंग ला रही है और उनकी आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार आया है।
सालाना 40 लाख रुपये तक की आय
आज गोपाल डूडी के लिए चिया की खेती आय का एक बड़ा जरिया बन चुकी है। आंकड़ों की बात करें तो वे अब इस खेती के माध्यम से सालाना 30 से 40 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। उनकी यह कामयाबी न केवल राजस्थान के किसानों के लिए, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है, जो खेती को आज के समय में भी एक मुनाफे वाला व्यवसाय साबित कर रहे हैं।
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