भोपाल: उफनते नाले में मौत के मुंह में समाए बुजुर्ग, पुलिस के जवानों ने दिखाई दिलेरी और बचाई जान

भोपाल के हनुमानगंज इलाके में भारी बारिश के दौरान एक बुजुर्ग गहरे और उफनते नाले में गिर गए थे, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बाहर निकाला और समय पर सीपीआर देकर नई जिंदगी दी।

गश्त के दौरान सुनाई दी चीखें

भोपाल के हनुमानगंज थाना क्षेत्र में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को जब शहर मूसलाधार बारिश में डूबा हुआ था, तब खाकी वर्दी के दो जांबाज जवानों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। हनुमानगंज थाने में तैनात कांस्टेबल मोहित शिवहरे और राजेंद्र रघुवंशी अपनी चार्ली-2/1 बाइक के जरिए इलाके में नियमित गश्त कर रहे थे। तभी अचानक रात के सन्नाटे और बारिश की गड़गड़ाहट के बीच उन्हें अग्रवाल तिराहा के पास बने एक बड़े नाले से 'बचाओ-बचाओ' की डरावनी चीखें सुनाई दीं। दोनों पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए अपनी बाइक उस दिशा में मोड़ दी।

नाले की दलदल में फंसे थे बुजुर्ग

मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस जवानों ने जो नजारा देखा, वह बेहद चौंकाने वाला था। वहां 60 साल के एक बुजुर्ग नाले में गिरे हुए थे। नाले में पानी का बहाव बेहद तेज था और बुजुर्ग कीचड़ व दलदल में बुरी तरह फंस चुके थे। गिरने की वजह से बुजुर्ग के सिर पर गंभीर चोटें आई थीं और वे लगातार खून बहने के कारण काफी कमजोर हो गए थे। बारिश के कारण नाले का पानी उफान पर था और बुजुर्ग धीरे-धीरे एक संकरे पुल की तरफ बह रहे थे। अगर वे उस पुल के नीचे चले जाते, तो वहां से निकलना लगभग नामुमकिन था और उनकी जान जाना तय था।

जान जोखिम में डालकर नाले में कूदे जवान

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए आरक्षक मोहित शिवहरे ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर सीधे उफनते और जानलेवा नाले में छलांग लगा दी। उन्होंने बड़ी हिम्मत के साथ दलदल के बीच फंसे बुजुर्ग को संभाला और उन्हें पानी के तेज बहाव के साथ बहने से रोक लिया। इसी बीच, आरक्षक राजेंद्र रघुवंशी और सब-इंस्पेक्टर रामसजीवन सहित अन्य पुलिस स्टाफ भी तुरंत वहां पहुंच गए। पूरी टीम ने एकजुट होकर कड़ी मशक्कत की और बुजुर्ग को सुरक्षित नाले से बाहर खींचने में सफलता प्राप्त की।

सीपीआर देकर लौटाई सांसें

जब बुजुर्ग को नाले से बाहर निकाला गया, तो उनकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। उनके फेफड़ों में काफी मात्रा में पानी भर गया था और ऐसा लग रहा था कि उनकी धड़कनें अब जवाब दे चुकी हैं। ऐसे में आरक्षक मोहित शिवहरे ने अपनी सूझबूझ और ट्रेनिंग का परिचय देते हुए बुजुर्ग को जमीन पर लेटाया और उन्हें मौके पर ही सीपीआर (चेस्ट कंप्रेशन और माउथ-टू-माउथ) देना शुरू किया। कुछ देर की कोशिशों के बाद बुजुर्ग के मुंह और पेट से पानी बाहर निकल आया। धीरे-धीरे उनकी सांसें वापस आने लगीं और हालत स्थिर होने लगी। इसके बाद पुलिसकर्मी तुरंत एक ऑटो का इंतजाम कर उन्हें इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल ले गए, जहां उन्हें भर्ती कराया गया है। फिलहाल, बुजुर्ग खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा का दर्दनाक वाकया

इस घटना ने सभी को ग्रेटर नोएडा के उस हादसे की याद दिला दी जो इसी साल जनवरी के महीने में घटित हुआ था। वहां 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से कार द्वारा अपने घर लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण उनकी कार अनियंत्रित होकर एक दीवार तोड़ते हुए गहरे नाले में जा गिरी थी। युवराज ने उस समय अपने पिता को वॉट्सऐप पर लोकेशन भी भेजी थी और करीब 90 मिनट तक मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद के लिए चिल्लाते रहे। हालांकि, समय पर मदद न मिल पाने के कारण उनकी जान चली गई थी। भोपाल के इस मामले में पुलिस की तत्परता ने साबित कर दिया कि सही समय पर लिया गया निर्णय किसी की जिंदगी को मौत के मुंह से खींच सकता है।

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