साइबर हमलों के बीच CBSE का रिवैल्यूएशन पोर्टल जारी, 56,000 से अधिक आवेदन, 38 लाख पैकेट DoS अटैक विफल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बताया कि लगातार साइबर हमलों के बावजूद उसका रिवैल्यूएशन पोर्टल चालू है। बुधवार रात तक 56,000 से ज्यादा छात्र कॉपी दोबारा जांच के लिए आवेदन कर चुके हैं और अब तक 38 लाख पैकेट DoS अटैक नाकाम किए जा चुके हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने जानकारी दी है कि उसके रिवैल्यूएशन पोर्टल पर लगातार साइबर हमले किए जा रहे हैं, फिर भी बोर्ड इन तमाम चुनौतियों से निपटते हुए पोर्टल का संचालन जारी रखे हुए है। बोर्ड के मुताबिक बुधवार रात 9.30 बजे तक 56,000 से ज्यादा छात्र अपनी कॉपियों की दोबारा जांच के लिए आवेदन कर चुके हैं। बोर्ड ने यह भी बताया कि अब तक 38 लाख पैकेट DoS अटैक को नाकाम किया जा चुका है।

आवेदन की अंतिम तारीख और प्रक्रिया

छात्रों के पास अपनी उत्तर पुस्तिका दोबारा जांच कराने के लिए आवेदन करने का मौका 6 जून तक है। इसके बाद 6 जून को रात 12 बजे पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। इच्छुक छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in/newsite_old/rchk.html पर जाकर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

बोर्ड ने एक्स पर दी जानकारी

सीबीएसई ने बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि आज रात 9:30 बजे तक पोर्टल ने वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए 56000 से ज्यादा एप्लीकेशन स्वीकार किए हैं। बोर्ड ने यह भी बताया कि आज दोपहर वेबसाइट पर 3.8 मिलियन पैकेट डिनायल ऑफ सर्विस अटैक को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया।

बोर्ड ने कहा कि उसकी टेक्निकल टीमें छात्रों को अधिक सहज, तेज और बिना रुकावट वाला अनुभव देने के लिए सिस्टम के प्रदर्शन पर लगातार नजर रख रही हैं और उसमें सुधार कर रही हैं।

क्या होता है पैकेट डिनायल ऑफ सर्विस अटैक

पैकेट डिनायल ऑफ सर्विस (DoS) हमले में हैकर किसी वेब पोर्टल पर बड़ी संख्या में नेटवर्क पैकेट भेजते हैं, जिससे सर्वर के संसाधन पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि असली यूजर वेबसाइट तक नहीं पहुंच पाते। हैकर अक्सर गलत तरीके से बनाए गए पैकेट, फर्जी ट्रैफिक या बार-बार कनेक्शन की रिक्वेस्ट भेजकर नेटवर्क की अलग-अलग लेयर को निशाना बनाते हैं। इन हमलों का मकसद सर्वर को क्रैश करना या बैंडविड्थ को ओवरलोड कर देना होता है।

आखिर क्यों मचा है बवाल

12वीं कक्षा के कुछ छात्रों का आरोप है कि बोर्ड की ओर से अपलोड की गई उनकी कॉपी असली कॉपी से अलग है, जिससे यह आशंका पैदा हो रही है कि छात्रों को गलत अंक मिले हैं। छात्रों का कहना है कि अपलोड की गई कॉपियों की हैंडराइटिंग उनकी हैंडराइटिंग से मेल नहीं खाती।

इस पूरे मामले की जांच के लिए सीबीएसई ने एक समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्ष एश राधा चौहान हैं। जरूरत पड़ने पर वह अन्य विभागों के अधिकारियों से भी सहयोग ले सकती हैं। यह पैनल एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

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