बिलासपुर के नन्हे उस्ताद की चमक
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर का नाम अब एक 11 साल के नन्हे गायक ने देशभर में रोशन कर दिया है। तनिष्क वर्मा नाम के इस प्रतिभाशाली बालक ने बहुत ही कम उम्र में संगीत की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। तनिष्क केवल गाते ही नहीं हैं, बल्कि वे सिंथेसाइजर, तबला, ढोलक और हारमोनियम जैसे कई जटिल वाद्य यंत्रों को खुद बजाते हुए लाइव परफॉर्मेंस देने में माहिर हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें अब 21 जुलाई 2026 को जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होने और अपनी प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया है।
संगीत का सफर और प्रेरणा
तनिष्क की संगीत यात्रा बेहद दिलचस्प है। मात्र चार साल की उम्र में जब बच्चे खेलकूद में व्यस्त रहते हैं, तनिष्क ने संगीत के सुरों को समझना शुरू कर दिया था। उनके संगीत के प्रति इस लगाव की शुरुआत उनके मामा अमित अंबस्थ के साथ हुई। तनिष्क बताते हैं कि जब वे बहुत छोटे थे, तब उनके मामा उन्हें अपनी गोद में बिठाकर पियानो बजाते थे। एक दिन नन्हे तनिष्क ने बिना किसी पूर्व प्रशिक्षण के उसी धुन को हूबहू दोहरा दिया, जिसे सुनकर सभी हैरान रह गए। यहीं से उनके संगीत के सफर का आधिकारिक आगाज हुआ। आज तनिष्क हिंदी, भोजपुरी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं के गीतों के साथ-साथ भजनों की प्रस्तुति देने में भी सिद्धहस्त हैं।
देश के बड़े मंचों पर गूंजी आवाज
तनिष्क ने अपनी गायकी और वाद्य यंत्रों के हुनर से देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी छाप छोड़ी है। बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में श्री श्री रविशंकर की उपस्थिति में उन्होंने भजन गाकर सबका मन मोह लिया था। इसके अलावा, उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ, भुवनेश्वर के विश्व प्रसिद्ध लिंगराज मंदिर और कई अन्य बड़े राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। वे दूरदर्शन रायपुर के लिए आधे घंटे की विशेष प्रस्तुति भी दे चुके हैं, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे कराओके ट्रैक का सहारा लेने के बजाय खुद वाद्य यंत्रों को बजाते हुए लाइव गाना पसंद करते हैं।
सम्मान और उपलब्धियों का सिलसिला
संगीत के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें कम उम्र में ही प्रतिष्ठित छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान से नवाजा गया है। तनिष्क की प्रतिभा का दायरा सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में भी उन्होंने मंचीय प्रस्तुतियां दी हैं। उन्होंने महज आठ साल की उम्र तक 60 से अधिक भजनों पर अधिकार कर लिया था। उनकी प्रमुख उपलब्धियों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- वॉयस ऑफ छत्तीसगढ़ प्रतियोगिता में फाइनलिस्ट।
- मुकेश नाइट ओपन स्टेज प्रतियोगिता के विजेता।
- ऑल इंडिया कल्चर आर्ट स्टेज प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान।
- व्यापार मेला गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान।
इन उपलब्धियों के चलते उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित पर्वतारोही नेहा धाकड़ के हाथों भी सम्मान प्राप्त हो चुका है।
पारिवारिक सहयोग और मार्गदर्शन
बिलासपुर के नर्मदा नगर के निवासी तनिष्क के पिता संजय वर्मा एक व्याख्याता हैं और उनकी माता विनीता वर्मा एक गृहिणी हैं। तनिष्क को बॉलीवुड फिल्म निर्देशक गणेश मेहता ने पहचान दी और सुगम संगीत का प्रशिक्षण प्रदान किया। वर्तमान में वे जांजगीर के महेंद्र राठौर से शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीख रहे हैं, जबकि आशीष किशोरिया से वे सिंथेसाइजर का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। तनिष्क के पिता संजय वर्मा का कहना है कि उनके बेटे की सफलताओं को देखकर पूरा परिवार भावुक हो जाता है। उनका मानना है कि हर माता-पिता को अपने बच्चों की रुचि को समझना चाहिए और उनका उत्साहवर्धन करना चाहिए। वे खुद तनिष्क के साथ हर कार्यक्रम में जाते हैं ताकि बच्चे का आत्मविश्वास बना रहे।
भविष्य के सपने
तनिष्क का लक्ष्य केवल एक गायक बनना ही नहीं, बल्कि भविष्य में एक सफल म्यूजिक कंपोजर और साउंड इंजीनियर बनने का है। वे अपनी कला को और निखारने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। तनिष्क अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने गुरुजनों, अपने मामा और अपने माता-पिता को देते हैं। उनका सपना है कि वे अपने संगीत के माध्यम से अपने जिले, अपने प्रदेश छत्तीसगढ़ और पूरे भारत का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन करें। 21 जुलाई 2026 की जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा की प्रस्तुति उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है, जिसके लिए वे पूरी तैयारी में जुटे हैं।
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