जापान में मातृत्व अवकाश पर छिड़ा विवाद
जापान के यावाता शहर की मेयर शोको कवाता के एक फैसले ने पूरे देश की राजनीति और सामाजिक सोच को झकझोर कर रख दिया है। कवाता ने निर्णय लिया है कि वह बच्चे के जन्म के बाद दो महीने की मेटरनिटी लीव यानी मातृत्व अवकाश लेंगी। यह मामला अब जापान में माताहारा यानी मातृत्व के कारण होने वाले भेदभाव पर एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर लोग बंटे हुए हैं, जहां एक तरफ उनके साहस का समर्थन किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ तबके उनकी तीखी आलोचना कर रहे हैं।
पहली मेयर जो बनेंगी मां
शोको कवाता जापान की पहली ऐसी मेयर हैं, जो अपने कार्यकाल के दौरान मातृत्व अवकाश लेने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, उनका यह निजी निर्णय जापान के कुछ पुरुषों के एक बड़े वर्ग को नागवार गुजर रहा है। कई लोगों का तर्क है कि मेयर के पद पर आसीन होने के बाद उन्हें अपनी निजी प्राथमिकताओं को जनता के काम से ऊपर नहीं रखना चाहिए। यह घटना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या एक महिला का मेयर होना और साथ ही मां बनना जापान जैसे देश में एक अपराध की तरह देखा जाता है?
क्या है पूरा मामला?
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 38 वर्षीय शोको कवाता को पिछले साल अगस्त के महीने में यावाता शहर का मेयर चुना गया था। कार्यभार संभालने के कुछ समय बाद ही उन्हें अपने गर्भवती होने का पता चला। उनका बच्चा जनवरी में होने वाला है, जिसे देखते हुए उन्होंने दो महीने की छुट्टी की घोषणा की है। उनके इस फैसले के बाद जापान की सामाजिक संरचना और महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर आलोचना और समर्थन
कवाता के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कुछ लोगों ने तर्क दिया है कि उन्हें मेयर बनने के तुरंत बाद बच्चा पैदा करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए था। आलोचकों का मानना है कि उन्हें अपनी पूरी ऊर्जा केवल शहर की जनता के कार्यों में लगानी चाहिए। दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि मातृत्व एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और एक महिला के पास यह अधिकार होना चाहिए कि वह अपने करियर और व्यक्तिगत जीवन के बीच गरिमा के साथ सामंजस्य बिठा सके। एक मां देश के भविष्य का निर्माण करती है, इसलिए उसे पेशेवर जीवन में भी सम्मान मिलना चाहिए।
शोको कवाता का पलटवार
अपनी आलोचनाओं का सामना करते हुए मेयर कवाता ने कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर अपने करियर और परिवार के बीच किसी एक को चुनने का कठिन दबाव झेलना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जापान जैसे समाज को अब बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक ऐसा माहौल बनाने की आवश्यकता है जहां महिलाएं बिना किसी अपराधबोध यानी गिल्ट के बच्चे को जन्म दे सकें और अपनी नौकरी भी जारी रख सकें। उनका यह कदम अन्य कामकाजी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
कामकाज और माताहारा का मुद्दा
जापान में माताहारा शब्द का प्रयोग मातृत्व के आधार पर होने वाले भेदभाव या उत्पीड़न को दर्शाने के लिए किया जाता है, जो वहां लंबे समय से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। कवाता ने स्पष्ट किया है कि भले ही वह छुट्टी पर रहेंगी, लेकिन वह जरूरी सरकारी कार्यों पर अपनी नजर बनाए रखेंगी। उनकी पूरी टीम शहर के दैनिक कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए तैयार है। मेयर का मानना है कि उनका यह फैसला समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच को बदलने की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास है।
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