इतिहास और स्थापत्य का संगम
कोटा के निकट स्थित चारचोमा का पंचमुखी महादेव मंदिर न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यह गुप्तकालीन स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना भी है। यह प्राचीन मंदिर अपने निर्माण शैली और अनूठी मूर्तिकला के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।
दुर्लभ पंचमुखी शिवलिंग
मंदिर के गर्भगृह में 75 सेंटीमीटर ऊँचा एक दुर्लभ पंचमुखी शिवलिंग विराजमान है। यह शिवलिंग काले कसौटी पत्थर से तराश कर बनाया गया है। इस प्रतिमा में भगवान शिव के पांच प्रमुख स्वरूपों, जिन्हें तत्पुरुष, अघोर, सद्योजात, वामदेव और ईशान के नाम से जाना जाता है, की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।
चमत्कारी कुंड और स्वास्थ्य लाभ
मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुंड स्थित है, जिसे लेकर भक्तों के बीच गहरी आस्था है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि इस कुंड के जल में स्नान करने से चर्म रोग जैसे कष्टों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि दूर-दराज से श्रद्धालु अपनी शारीरिक समस्याओं से निजात पाने की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं।
पौराणिक कथाएं और शिलालेख
इस मंदिर का संबंध पौराणिक मान्यताओं में हनुमान और विभीषण की कथाओं से भी जोड़ा जाता है। इसके अलावा, यहां मौजूद ब्राह्मी लिपि के शिलालेख इस मंदिर के गौरवशाली और प्राचीन इतिहास की पुष्टि करते हैं।
विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं का तांता
चारचोमा महादेव मंदिर में सावन का महीना और शिवरात्रि का पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। इन अवसरों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो शिवलिंग के दर्शन और कुंड में स्नान के लिए लंबी कतारों में खड़े होते हैं।
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