महाराष्ट्र में मची नई सियासी खलबली
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से भारी उठापटक के आसार नजर आ रहे हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) अभी अपने 6 सांसदों के बागी होने के झटके से पूरी तरह संभल भी नहीं पाई थी कि अब पार्टी को एक और बड़ा झटका देने की पटकथा लिखी जा चुकी है। चर्चा है कि ठाणे से शुरू हुआ 'ऑपरेशन टाइगर-2' सफल होने के बाद अब 'ऑपरेशन टाइगर-3' के तहत उद्धव ठाकरे को कमजोर करने की नई मुहिम तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि एकनाथ शिंदे गुट ठाकरे खेमे के 14 विधायकों को अपने साथ लाने के लिए बेहद गुप्त तरीके से काम कर रहा है।
क्या है ऑपरेशन टाइगर-3 का पूरा प्लान
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा अभियान ठाकरे गुट के उन विधायकों को साधने के लिए चलाया जा रहा है जो वर्तमान में पार्टी नेतृत्व से दूरी महसूस कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन शिंदे खेमे की तरफ से चल रही इन गतिविधियों ने उद्धव ठाकरे गुट की नींद उड़ा दी है। कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे इस पूरी रणनीति को बेहद सावधानी और गोपनीयता के साथ अंजाम दे रहे हैं ताकि उद्धव ठाकरे को संभलने का मौका न मिले।
कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए खास रणनीति
संभावित टूट की चर्चाओं के बीच यह भी दावा किया जा रहा है कि ठाकरे गुट के विधायकों को अयोग्यता जैसी कानूनी बाधाओं से बचाने के लिए शिंदे गुट ने पहले से ही ठोस तैयारी कर रखी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह दल-बदल होता है, तो विधायकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशेष विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है। सूत्रों की मानें तो इन विधायकों को कुछ समय के लिए किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सकता है ताकि वे पूरी तरह से उद्धव खेमे की पहुंच से बाहर यानी ऑउट ऑफ रीच हो जाएं। उनके रहने, भोजन और सुरक्षा की व्यवस्थाओं को लेकर भी गुप्त रूप से योजना तैयार की जा रही है ताकि ऐन मौके पर किसी तरह की कोई कमी न रहे।
उद्धव की व्यस्तताओं के बीच शिंदे का दांव
एक तरफ उद्धव ठाकरे अपने उन 6 सांसदों के क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं जो पहले ही उनका साथ छोड़ चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी गैर-मौजूदगी का फायदा उठाकर शिंदे गुट अपने मिशन को आगे बढ़ा रहा है। उद्धव ठाकरे जनसभाओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में पूरी तरह व्यस्त हैं, लेकिन इसी दौरान पार्टी के विधायकों को तोड़ने का खेल परदे के पीछे से चल रहा है।
मुलाकातों ने बढ़ाई सरगर्मियां
बीते कुछ दिनों में ठाकरे गुट के कुछ विधायकों की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ हुई गुप्त मुलाकातों ने इन कयासों को और अधिक हवा दे दी है। इन मुलाकातों के बाद ही कथित 'ऑपरेशन टाइगर-3' की चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन मुलाकातों का सीधा संबंध पार्टी के भीतर होने वाली बड़ी टूट से हो सकता है।
8 जुलाई को साफ हो सकती है तस्वीर
राजनीतिक सूत्रों का यह भी दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे निर्णायक दौर 8 जुलाई को देखने को मिल सकता है। जुलाई के पहले हफ्ते में जो कुछ भी होने वाला है, वह महाराष्ट्र की सत्ता की तस्वीर को एक बार फिर बदल सकता है। हालांकि, अभी ये केवल राजनीतिक दावे और अटकलें ही हैं। आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि क्या वास्तव में ठाकरे गुट में इतनी बड़ी टूट होने जा रही है या फिर यह महज एक दबाव की रणनीति है जिसके जरिए उद्धव ठाकरे को मानसिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें इन विधायकों के अगले कदम पर टिकी हैं।
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