हिमाचल प्रदेश में किन्नर कैलाश यात्रा पर पूर्ण विराम
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली किन्नर कैलाश यात्रा को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया है। जिला किन्नौर के प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने सामूहिक रूप से इस यात्रा को आगामी आदेशों तक स्थगित रखने की घोषणा की है, जिससे स्पष्ट हो गया है कि इस वर्ष भक्त पवित्र किन्नर कैलाश के दर्शनों के लिए प्रस्थान नहीं कर पाएंगे।
उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया निर्णय
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो, इस धार्मिक यात्रा के संबंध में राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं लोक शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और दशकों पुरानी परंपराओं पर गहन चर्चा की गई। पूर्व निर्धारित योजना के तहत यह यात्रा 1 जुलाई 2026 से 30 जुलाई 2026 के बीच आयोजित की जानी थी। हालांकि, जमीनी हकीकत को परखने के लिए भेजे गए दल की रिपोर्ट ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया।
विशेष निरीक्षण दल की रिपोर्ट और खतरे
जिला प्रशासन द्वारा वन विभाग और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर 21 जून को एक विशेष रेकी दल को यात्रा मार्ग की जांच के लिए भेजा गया था। इस निरीक्षण दल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कई ऐसे खतरनाक पहलुओं का उल्लेख किया है, जिन्हें नजरअंदाज करना जान जोखिम में डालने के समान है। रिपोर्ट की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- ग्लेशियर और चट्टानों का खतरा: मिलिंग खाटा से लेकर पवित्र शिवलिंग तक के मार्ग पर बड़े-बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं, जिनसे लगातार चट्टानें गिरने का गंभीर अंदेशा बना हुआ है।
- अस्थिर बोल्डर: ग्लेशियर के अंदर और उनके आसपास विशालकाय पत्थर और बोल्डर बेहद अस्थिर अवस्था में लटके हुए हैं, जो किसी भी समय नीचे गिर सकते हैं।
- मार्ग का अवरुद्ध होना: गुफा से सोरंग के बीच का रास्ता कई स्थानों पर विशाल बोल्डरों के गिरने से पूरी तरह बंद हो चुका है। ये बोल्डर अभी भी डगमग स्थिति में हैं और इन्हें हटाना फिलहाल संभव नहीं है।
- तापमान का असर: लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे मुख्य मार्ग पर मलबे और पत्थरों के आने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
- सुरक्षा संकट: मिलिंग खाटा से पवित्र गुफा तक का वह रास्ता जहां श्रद्धालु अक्सर रात के समय यात्रा करते हैं, वर्तमान में अत्यधिक जोखिमपूर्ण हो चुका है।
प्रशासन की अपील
किन्नौर के डीसी अमित सिंह ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं के साथ-साथ बचाव और आपदा राहत दलों की सुरक्षा जिला प्रशासन के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन्हीं वजहों से प्रशासन ने किन्नर कैलाश यात्रा 2026 को अगले आदेशों तक टाल दिया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और उन सभी लोगों से आग्रह किया है जो यात्रा की योजना बना रहे थे कि वे अगले आदेश तक किसी भी स्थिति में यात्रा मार्ग पर जाने का प्रयास न करें। सुरक्षित रहना ही इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
स्थानीय विरोध और धार्मिक भावनाएं
यह भी गौर करने वाली बात है कि किन्नर कैलाश यात्रा को लेकर स्थानीय स्तर पर भी काफी विरोध देखने को मिल रहा था। इस संबंध में जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपे गए थे। स्थानीय लोगों और धार्मिक मान्यताओं का तर्क था कि पोवारी गांव के कुलदेवता परका शंकर और रिब्बा गांव के कुलदेवता कसूराज ने देववाणी के माध्यम से यह निर्देश दिए थे कि इस यात्रा को पूरी तरह बंद कर दिया जाना चाहिए। स्थानीय निवासियों का कहना था कि भारी भीड़ के कारण क्षेत्र की प्राकृतिक पवित्रता और पारिस्थितिक संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रशासन ने पहले इन आपत्तियों को दरकिनार किया था, लेकिन अंततः भौगोलिक और सुरक्षा संबंधी गंभीर खतरों को स्वीकार करते हुए यात्रा पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया है।
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