दरभंगा की प्रीति का जुनून: चौथी कक्षा से शुरू हुआ मिथिला पेंटिंग का सफर, अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने का है सपना

दरभंगा की प्रीति कुमारी ने चौथी कक्षा से ही मिथिला पेंटिंग को अपना लिया था। ग्रेजुएशन कर रहीं प्रीति अब इस पारंपरिक कला को न केवल अपना करियर बनाना चाहती हैं, बल्कि इसे देश-दुनिया तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मिथिला की सांस्कृतिक विरासत और प्रीति की कला यात्रा

मिथिलांचल की पहचान आज केवल मखाना और पान तक सीमित नहीं रह गई है। इस क्षेत्र की मिट्टी से उपजी और सदियों पुरानी कला, मिथिला पेंटिंग, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा चुकी है। गांव की कच्ची दीवारों से निकलकर यह कला अब आधुनिक गैलरियों की शोभा बढ़ा रही है। इस बदलाव में महिलाओं और नई पीढ़ी के बच्चों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी कला के जरिए आज सैकड़ों परिवारों की आजीविका चल रही है। दरभंगा के लक्ष्मी सागर की रहने वाली प्रीति कुमारी इसी सांस्कृतिक धरोहर की एक नई और उत्साही चेहरा बनकर उभरी हैं।

चौथी कक्षा से तूलिका तक का सफर

प्रीति कुमारी का मिथिला पेंटिंग से लगाव कोई नया नहीं है। उनका यह सफर तब शुरू हुआ जब वह महज चौथी कक्षा की छात्रा थीं। प्रीति साझा करती हैं कि बचपन से ही उन्हें इन चित्रों के प्रति एक स्वाभाविक आकर्षण महसूस होता था। वे बताती हैं कि अपनी स्कूल की किताबों के किनारों पर वे अक्सर मछली, मोर और बांस की टहनियों के चित्र बनाया करती थीं। हालांकि, शुरुआती दौर में शिक्षकों की डांट भी खानी पड़ती थी, लेकिन उनकी कला के प्रति रुचि कम नहीं हुई। उन्होंने अपने घर के पास रहने वाली एक महिला से इस कला के बुनियादी गुर सीखे। कोहबर, गोसाईं घर, और राजा-रानी के पारंपरिक मोटिफ्स की बारीकियां उन्होंने बखूबी सीखीं और उन्हें अपनी कल्पनाशीलता के साथ एक नया स्वरूप प्रदान किया।

पढ़ाई और जुनून के बीच संतुलन

प्रीति का मानना है कि रंगों में डूब जाना उनके लिए किसी ध्यान से कम नहीं है। हालांकि पढ़ाई को लेकर उनके मन में पहले संशय था, लेकिन उनके माता-पिता ने उनके इस जुनून को समझा और उनका पूरा समर्थन किया। उनके अभिभावकों ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यदि वे इस क्षेत्र में अपना भविष्य देखती हैं, तो उन्हें आगे बढ़ना चाहिए। वर्तमान में प्रीति स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा हैं और अपनी अकादमिक पढ़ाई के साथ-साथ कागज और कपड़े पर मिथिला पेंटिंग करने का काम जारी रखे हुए हैं।

भविष्य की योजनाएं और बड़ा सपना

प्रीति की भविष्य की योजनाएं काफी स्पष्ट हैं। फिलहाल, वे अपनी कला को और अधिक निखारने पर ध्यान दे रही हैं। उनका लक्ष्य है कि वे अपनी पेंटिंग्स को बड़े बाजार तक ले जाएं। उन्होंने यह तय कर रखा है कि ऑनलाइन मार्केटिंग के माध्यम से वे अपनी कला को देश और विदेश के कोने-कोने तक पहुंचाएंगी। इसके अलावा, उनका सपना है कि वे अपनी एक छोटी सी दुकान खोलें, जो न केवल उनके उत्पादों का केंद्र हो, बल्कि वहां मिथिला क्षेत्र की अन्य लड़कियां आकर इस कला को सीख सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। प्रीति का यह प्रयास साबित करता है कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो एक छोटी सी शुरुआत भी कला के नक्शे पर बड़ी छाप छोड़ सकती है।

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