मुरादाबाद में बनकर तैयार हुआ त्रिशूल भारतीय रक्षा म्यूजियम, सेना के पराक्रम की गाथा सुनाएगा यह आधुनिक केंद्र

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में देश का अनोखा 'त्रिशूल भारतीय रक्षा संग्रहालय' बनकर तैयार हो गया है, जहाँ 1947 से लेकर कारगिल युद्ध तक के गौरवशाली इतिहास को आधुनिक तकनीक के जरिए दिखाया जाएगा। इस संग्रहालय का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों जल्द ही किया जाएगा।

मुरादाबाद में रक्षा के गौरव का नया केंद्र

उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद जिला अब एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। यहाँ भारतीय सेना के अद्भुत शौर्य, वीरता और बलिदान को समर्पित 'त्रिशूल भारतीय रक्षा संग्रहालय' का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह संग्रहालय पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनी तरह का एक आधुनिक और डिजिटल केंद्र साबित होगा। इस म्यूजियम का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को भारतीय सेना के पराक्रम और उनके त्याग से परिचित कराना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही इस महत्वपूर्ण केंद्र का विधिवत उद्घाटन करेंगे।

डिजिटल तकनीक से जीवंत होगी इतिहास की गाथा

इस संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है। यहाँ आने वाले दर्शक 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय से लेकर कारगिल विजय तक के महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों को देख सकेंगे। इसमें सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक सैन्य अभियानों को लाइट-साउंड शो, विशाल डिजिटल स्क्रीन और इंटरैक्टिव पैनल के जरिए बेहद जीवंत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित करेगा।

रिकॉर्ड समय में तैयार हुआ अनूठा प्रोजेक्ट

नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस संग्रहालय को मात्र 11 महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। इस विचार के पीछे का मुख्य कारण कारगिल विजय की 25वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया संबोधन था, जिसमें उन्होंने देश के लिए कुछ विशेष करने का आह्वान किया था। मुख्यमंत्री ने खुद इस परियोजना का निरीक्षण किया था और इसकी सराहना की थी, जिससे इस काम को पूरा करने के लिए एक बड़ी प्रेरणा मिली।

तीनों सेनाओं का एकीकृत प्रदर्शन

यह म्यूजियम भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों अंगों यानी थल सेना, नौसेना और वायु सेना की उपलब्धियों को एक ही छत के नीचे समेटे हुए है। यहाँ केवल हथियारों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसे एक 'इंटरएक्टिव जोन' के रूप में विकसित किया गया है। इसमें अधिकारी किस प्रकार के रैंक धारण करते हैं, उनकी वर्दी के बदलने का इतिहास क्या है और सेना की कार्यप्रणाली कैसी होती है, इन सभी को मॉडल के जरिए समझाया गया है।

रक्षा मंत्रालय और डीआरडीओ का मिला सहयोग

इस संग्रहालय को समृद्ध बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्री के स्तर पर विशेष सहयोग मिला है। यहाँ मिग-21 विमान के अलावा कई आधुनिक हथियार मौजूद हैं। साथ ही, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ से प्राप्त इंडियन मिसाइल सिस्टम के मॉडल, ड्रोन मॉडल और विशाखापट्टनम जैसे नौसैनिक युद्धपोतों के मॉडल यहाँ की शोभा बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, यहाँ लेजर गन सपोर्ट सेटअप भी लगाया गया है, जो युवाओं को सेना के आधुनिक हथियारों से रूबरू कराएगा।

विशेषज्ञों ने माना अद्वितीय

नगर आयुक्त ने बताया कि जब सेना के मेजर जनरल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संग्रहालय का दौरा किया, तो उन्होंने इसे देश का सबसे आधुनिक और अनोखा संग्रहालय बताया। यह अपने आप में एक 'कॉम्पैक्ट म्यूजियम' है, जहाँ डीआरडीओ के लिए एक पूरा फ्लोर आरक्षित किया गया है। यहाँ मनोरंजन और शिक्षा के लिए खेल (स्पोर्ट्स) की भी व्यवस्था की गई है। यह संग्रहालय न केवल सूचना का केंद्र है, बल्कि यह गर्व का अनुभव प्रदान करने वाला एक राष्ट्रीय धरोहर स्थल है।

भविष्य की पीढ़ी के लिए प्रेरणा

यह संग्रहालय विशेष रूप से युवाओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें उन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है जो एक युवा सैनिक के मन में जिज्ञासा पैदा करते हैं। इस म्यूजियम का निर्माण यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय सेना का पराक्रम आने वाली कई सदियों तक सुरक्षित रहे और युवा इससे निरंतर प्रेरणा लेते रहें। अब यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार है और जल्द ही इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

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