बघेलखंड की रसोई का देसी स्वाद
विंध्य और बघेलखंड अंचल की रसोई अपनी सादगी और शुद्ध देसी स्वाद के लिए पूरे प्रदेश में जानी जाती है। इस क्षेत्र में कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें बहुत कम सामग्री लगती है, लेकिन स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएं। इन्हीं खास व्यंजनों में से एक है बघेलखंडी स्टाइल बेसन गट्टे की सब्जी, जिसे स्थानीय भाषा में कई गांवों में बेसन की ढोच या गट्टे का रसा भी कहा जाता है। आमतौर पर गट्टे की सब्जी का जिक्र आते ही लोगों को राजस्थान की याद आती है, लेकिन बघेलखंड में बनने वाली यह डिश अपने मसालों और बनाने के अनूठे तरीके के कारण बिल्कुल अलग पहचान रखती है।
क्यों खास है यह डिश
सबसे अच्छी बात यह है कि जब रसोई में कोई हरी सब्जी मौजूद नहीं होती या परिवार के लोग रोज-रोज एक जैसी दाल-सब्जी खाकर बोर हो जाते हैं, तब यह देसी व्यंजन घर के हर सदस्य की पहली पसंद बन जाता है। सतना निवासी मीना द्विवेदी के अनुसार, पहले के दौर में जब गांवों में सामान्य सब्जियां आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं या लोग रोज के खाने से ऊब जाते थे, तब महिलाएं बेसन का इस्तेमाल कर झटपट गट्टे वाली रसेदार सब्जी तैयार कर लेती थीं। यह व्यंजन न केवल कम खर्चीला है, बल्कि पेट भरने के साथ स्वाद में भी लाजवाब है। आज भी कई घरों में इस रेसिपी को उसी पुराने पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है ताकि इसका असली और सोंधा स्वाद बरकरार रहे।
नरम और स्वादिष्ट गट्टे बनाने की विधि
बघेलखंडी स्टाइल गट्टे तैयार करने के लिए सबसे पहले एक बाउल में एक कप बेसन लें। इसमें स्वादानुसार नमक, एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा छोटा चम्मच हाथों से मसलकर अजवाइन और मोयन के लिए एक बड़ा चम्मच तेल या घी डालें। अब गुनगुने पानी की सहायता से इसे मध्यम नरम गूंथ लें। गूंथे हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें हाथों से लंबा बेलनाकार आकार दें। इसके बाद तीन से चार कप पानी को अच्छी तरह उबालें और इन गट्टों को उसमें डाल दें। इन्हें करीब 10 से 12 मिनट तक पकने दें। जब गट्टे पानी की सतह पर तैरने लगें और उन पर छोटे-छोटे दाने उभर आएं, तो समझें कि गट्टे तैयार हैं। इन्हें बाहर निकालकर ठंडा करें और आधा इंच के टुकड़ों में काट लें। ध्यान रखें, गट्टे उबालने के बाद बचे हुए पानी को फेंकना नहीं है, इसका उपयोग बाद में ग्रेवी बनाने में किया जाएगा।
कैसे तैयार करें असली बघेलखंडी जायका
कटे हुए गट्टों को सबसे पहले सरसों के तेल में हल्का फ्राई करें जब तक कि वे सुनहरे न हो जाएं। अब उसी कड़ाही में थोड़ा और सरसों का तेल डालें और धुआं निकलने तक गर्म करें। इसमें राई, जीरा और हींग का तड़का लगाएं। तड़का तैयार होने के बाद इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट और दो बारीक कटे प्याज डालें। प्याज को सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद हल्दी, धनिया पाउडर और कश्मीरी लाल मिर्च डालें। अंत में दो कटे हुए टमाटर या उनकी प्यूरी मिलाएं और मसाले को तब तक पकाएं जब तक कि वह तेल न छोड़ दे।
रसे में घुलता है पारंपरिक स्वाद
मसाला भुन जाने के बाद इसमें पहले से बचाकर रखा हुआ गट्टे वाला पानी और जरूरत के अनुसार थोड़ा अतिरिक्त गुनगुना पानी मिलाएं। इसमें एक उबाल आने दें। अब फ्राई किए हुए गट्टे डालें और स्वादानुसार नमक मिलाकर कड़ाही को ढक दें। इसे धीमी आंच पर करीब 7 से 8 मिनट तक पकने दें ताकि गट्टे रसे के स्वाद को गहराई से सोख लें और भीतर तक कोमल हो जाएं। पकने के बाद इसमें आधा छोटा चम्मच गरम मसाला और ढेर सारा बारीक कटा हरा धनिया डालें। आपकी गरमागरम बघेलखंडी बेसन गट्टे की सब्जी तैयार है। इसे आप रोटी, पराठे या उबले हुए चावल के साथ परोस सकते हैं, जो आज भी विंध्य की पारंपरिक रसोई की पहचान मानी जाती है।
https://hindi.news18.com/news/lifestyle/recipe-authentic-baghelkhand-style-besan-gatta-curry-recipe-local18-10610928.html