फिक्स्ड डिपॉजिट बनाम रिकरिंग डिपॉजिट: निवेश के लिए कौन सा विकल्प है आपके लिए सबसे सही?

निवेश को लेकर भारतीय परिवारों की पहली पसंद आज भी एफडी और आरडी ही हैं, लेकिन दोनों के काम करने के तरीके और रिटर्न में बड़ा अंतर है। आइए विस्तार से जानते हैं कि किस स्थिति में आपको अपना पैसा कहां निवेश करना चाहिए।

निवेश का सुरक्षित रास्ता

आज के दौर में जब शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की चर्चा हर तरफ होती है, फिर भी सुरक्षित निवेश के मामले में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। भारतीय मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए ये निवेश के सबसे भरोसेमंद साधन बने हुए हैं। हालांकि, ज्यादातर निवेशक इन दोनों के बीच के सूक्ष्म अंतर को नहीं समझ पाते हैं। सही आर्थिक निर्णय लेने के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि आपके पास मौजूद पूंजी और आपकी बचत करने की शैली के हिसाब से कौन सा विकल्प आपके वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम है।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) क्या है और यह किसके लिए है?

अगर आपके पास निवेश के लिए एकमुश्त बड़ी रकम उपलब्ध है, तो FD आपके लिए सबसे मुफीद विकल्प है। मान लीजिए आपको नौकरी में बोनस मिला है, किसी पुरानी पॉलिसी की मैच्योरिटी का पैसा आया है या आपने लंबे समय से कोई बचत जमा कर रखी है, तो आप उस पूरे पैसे को एक साथ बैंक में जमा कर सकते हैं। इसमें आपको एक निश्चित समय सीमा के लिए बैंक के पास पैसा ब्लॉक करना होता है, जो 1 साल से लेकर 5 साल या उससे अधिक भी हो सकता है। बैंक इसके बदले में आपको एक तय ब्याज दर की गारंटी देता है। समय पूरा होने पर मूलधन के साथ-साथ ब्याज का पूरा हिस्सा आपको वापस मिल जाता है।

रिकरिंग डिपॉजिट (RD) किसे चुननी चाहिए?

दूसरी ओर, RD उन लोगों के लिए एक बेहतरीन जरिया है जिनके पास एक साथ निवेश करने के लिए बड़ी रकम नहीं है। यदि आप नौकरीपेशा हैं और अपनी हर महीने की सैलरी में से कुछ हिस्सा बचाना चाहते हैं, तो आरडी आपके अनुशासन को बनाए रखने में मदद करती है। इसमें आपको हर महीने एक निश्चित छोटी राशि, जैसे ₹1000 या ₹5000, एक पूर्व-निर्धारित समय के लिए बैंक में जमा करनी पड़ती है। यह तरीका उन युवाओं, छात्रों और वेतनभोगी लोगों के लिए आदर्श है जो छोटी बचत से धीरे-धीरे एक बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं।

रिटर्न का गणित: FD बनाम RD

आम तौर पर लोग यह गलती कर बैठते हैं कि अगर FD और RD दोनों पर ब्याज दर समान है, तो मिलने वाला मुनाफा भी एक बराबर होगा। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता है। FD में आपका पूरा निवेश पहले दिन से ही ब्याज अर्जित करना शुरू कर देता है। इसके विपरीत, RD में पैसा किस्तों में जमा होता है। जो पैसा आप आरडी में बाद के महीनों में जमा करते हैं, उस पर मिलने वाला ब्याज कम अवधि के लिए ही प्रभावी होता है। यही कारण है कि समान ब्याज दर के बावजूद FD से मिलने वाला कुल रिटर्न, आरडी की तुलना में अधिक होता है।

समय से पहले निकासी का नुकसान

दोनों ही निवेश योजनाओं का पूरा लाभ उठाने का मूल मंत्र है कि इन्हें मैच्योरिटी तक न छेड़ा जाए। हालांकि, बैंकों ने आपातकालीन स्थितियों के लिए समय से पहले पैसे निकालने की सुविधा दी है, लेकिन ऐसा करना आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। यदि आप बीच में निवेश तोड़ते हैं, तो बैंक आपसे पेनल्टी शुल्क वसूल सकता है या फिर आपकी प्रभावी ब्याज दर को काफी कम कर सकता है। इसलिए निवेश का समय चुनते समय भविष्य की जरूरतों का आकलन करना बेहद आवश्यक है।

स्मार्ट निवेश की रणनीति

एक जागरूक निवेशक वह है जो इन दोनों का तालमेल अपनी जरूरतों के साथ बिठाना जानता है। आप इन दोनों को एक साथ भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि आपको कहीं से बड़ी रकम मिलती है, तो उसे FD में डाल दें और साथ ही हर महीने की सैलरी से बचत के लिए एक RD शुरू कर दें। इस तरह आप अपनी अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह की वित्तीय जरूरतों को सुरक्षित तरीके से पूरा कर सकते हैं।

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