वसीयत के बिना मौत होने पर संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है, जानिए क्या कहता है कानून

अगर किसी व्यक्ति की बिना वसीयत बनाए मृत्यु हो जाती है, तो उनकी संपत्ति का उत्तराधिकार उनके धार्मिक पर्सनल लॉ के नियमों के अनुसार तय किया जाता है।

वसीयत न होने पर क्या होती है स्थिति

जब कोई व्यक्ति अपने पीछे कोई कानूनी वसीयत या Will छोड़े बिना इस दुनिया से चला जाता है, तो कानून की भाषा में इसे इंटेस्टेट यानी बिना वसीयत वाली मृत्यु माना जाता है। इस स्थिति में मृतक की संपत्ति का वितरण उनकी निजी इच्छा के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार द्वारा निर्धारित उत्तराधिकार कानूनों के जरिए होता है।

कानूनी प्रक्रिया और उत्तराधिकार के नियम

भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग उत्तराधिकार कानून लागू हैं। जब तक कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति के लिए वसीयत नहीं बनाता, तब तक उनके परिवार में संपत्ति का बंटवारा इन्हीं कानूनों के तहत किया जाता है। ये नियम तय करते हैं कि संपत्ति का कानूनी हकदार कौन होगा और इसका बंटवारा किस अनुपात में किया जाएगा।

कानूनी विकल्प और व्यक्तिगत कानून

भारत में संपत्ति के उत्तराधिकार के लिए निम्नलिखित कानून मुख्य रूप से प्रभावी हैं:

  • हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम: यह कानून हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनियों के बीच संपत्ति के बंटवारे को नियंत्रित करता है।
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ: यह शरिया कानून के सिद्धांतों पर आधारित है, जो संपत्ति के वितरण को निर्देशित करता है।
  • भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम: यह अन्य धर्मों के मानने वालों के लिए लागू होता है।

इन कानूनों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि बेटों और परिवार के अन्य वारिसों का संपत्ति में कितना हिस्सा होगा। ऐसी स्थिति में परिवार के सामने कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र यानी सक्सेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने का विकल्प होता है, ताकि मृतक की संपत्ति को कानूनी रूप से वारिसों के नाम हस्तांतरित किया जा सके।

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