कम लागत में बंपर कमाई का जरिया
बहराइच जिले के मिर्जापुर गांव में रहने वाले प्रगतिशील किसान प्रमोद कुमार खेती में एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। वे पारंपरिक फसलों की जगह घुइयां की खेती कर रहे हैं, जो उनके लिए मुनाफे का बड़ा स्रोत साबित हुई है। प्रमोद कुमार के अनुसार, इस फसल की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम समय में तैयार होने की क्षमता है। मात्र 3 से 4 महीने की अवधि में यह फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।
मुनाफा और बाजार में मांग
आर्थिक लाभ की बात करें तो किसान का कहना है कि एक बीघा जमीन में घुइयां की खेती करने पर कुल लागत करीब 25,000 रुपये आती है। इसके बदले में किसान को 70,000 से 75,000 रुपये तक की शुद्ध कमाई आसानी से हो जाती है। बाजार और मंडियों में इस सब्जी की मांग साल भर बनी रहती है, जिसके कारण किसानों को इसके बेहतर दाम मिल जाते हैं।
आवारा पशुओं से सुरक्षा
घुइयां की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि किसानों को रखवाली की चिंता नहीं करनी पड़ती। नीलगाय और अन्य आवारा पशु इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, जिससे रात-रात भर जागकर खेत की रखवाली करने की मेहनत से किसान पूरी तरह मुक्त हो जाते हैं। यह नकदी फसल उन किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम मेहनत में अच्छा लाभ कमाना चाहते हैं।
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