बापू नगर में मचा हड़कंप
हरियाणा के फरीदाबाद में एक बार फिर बुलडोजर की गूंज सुनाई देने की तैयारी है। नेहरू कॉलोनी में हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद, अब प्रशासन की नजरें बल्लभगढ़ स्थित बापू नगर पर टिक गई हैं। नगर निगम ने बापू नगर के निवासियों के लिए एक सख्त फरमान जारी करते हुए बस्ती खाली करने का आदेश दिया है। इस सरकारी नोटिस के बाद से इलाके के 800 परिवारों में दहशत का माहौल है और सभी अपने आशियाने को लेकर गहरे संकट में हैं।
नगर निगम का दावा और समय सीमा
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बापू नगर के जिस इलाके को खाली कराया जाना है, वह करीब 10 एकड़ से भी अधिक सरकारी जमीन पर बसा है। निगम का कहना है कि यह पूरी बस्ती अवैध रूप से सरकारी भूमि पर कब्जा करके बसाई गई है। प्रशासन ने क्षेत्र के सभी 800 घरों को नोटिस भेज दिया है। नियम के मुताबिक, इस नोटिस की अवधि बुधवार को पूरी हो रही है, जिसके तुरंत बाद ही अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में बुलडोजर की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा।
नेहरू कॉलोनी मामले से जुड़ा संदर्भ
दिलचस्प बात यह है कि फरीदाबाद में इससे पहले नेहरू कॉलोनी में की जा रही तोड़फोड़ को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बड़ा दखल दिया है। कोर्ट ने फिलहाल उस क्षेत्र में की जा रही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मामले की अगली सुनवाई जो कि 07 जुलाई को तय की गई है, तब तक किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। अब बापू नगर के निवासी इसी राहत की उम्मीद में अपनी फरियाद प्रशासन के सामने रख रहे हैं।
निवासियों का दर्द और विरोध
प्रशासन द्वारा भेजे गए इस नोटिस ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। बापू नगर के निवासी पुनर्वास की मांग को लेकर लामबंद हो गए हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बेघर करना उनके साथ अन्याय है। निवासियों के मुताबिक, वे यहां पिछले 20 से 35 साल से रह रहे हैं। अपनी मेहनत की कमाई का एक एक पैसा जोड़कर उन्होंने अपने छोटे-छोटे आशियाने बनाए थे, जिन्हें अब प्रशासन चंद पलों में मलबे में तब्दील करने की तैयारी कर रहा है।
सरकारी दस्तावेजों का हवाला
बापू नगर के लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। निवासियों का दावा है कि उनके पास सभी आवश्यक सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं और वे वर्षों से यहां लगातार मतदान भी कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर चुनाव में नेता उन्हें पक्के मकान का वादा कर वोट ले जाते हैं, लेकिन संकट के समय उनकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं है। अब उनकी केवल एक ही मांग है कि सरकार बुलडोजर चलाने से पहले उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि परिवारों को सड़क पर न आना पड़े।
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