रिहाई के बाद गुरुद्वारा पहुंचे निहंग
उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में उपजे विवाद के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए तीनों निहंग सिखों को आखिरकार जेल से रिहा कर दिया गया है। अदालत से जमानत मिलने के बाद ये निहंग सिख रविवार की सुबह सीधे हिमाचल प्रदेश स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा पांवटा साहिब पहुंचे। अपनी रिहाई के पश्चात सबसे पहले गुरुद्वारे में शीश नवाकर उन्होंने अपनी धार्मिक आस्था का परिचय दिया।
भव्य स्वागत और अरदास का आयोजन
जब ये तीनों निहंग सिख गुरुद्वारा पांवटा साहिब पहुंचे, तो वहां उनका विशेष रूप से स्वागत किया गया। उन्हें नई पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया, जिसके बाद उन्होंने गुरु दरबार में पहुंचकर मत्था टेका और अरदास की। इस अवसर पर दशमेश तरना दल के मुख्य जत्थेदार बाबा मेजर सिंह सोढ़ी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बाबा मेजर सिंह ने न केवल इन निहंगों का स्वागत किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि अब इन सभी को पूरी सुरक्षा के साथ उनके गृह राज्य पंजाब वापस भेज दिया जाएगा।
विवाद का अंत और शांति की बहाली
इस गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर काफी तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। कुल्हाल चेकपोस्ट पर स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि मोहाली और चंडीगढ़ से आए कई निहंग सिखों ने उत्तराखंड के देहरादून की ओर कूच करना शुरू कर दिया था। हालांकि, समय रहते पांवटा साहिब गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, उत्तराखंड प्रशासन के प्रतिनिधिमंडल और निहंगों के बीच सार्थक बातचीत हुई। इस सफल वार्ता के बाद विवाद को पूरी तरह सुलझा लिया गया। वर्तमान में, बॉर्डर पर स्थिति पूरी तरह सामान्य और शांतिपूर्ण बनी हुई है और सभी निहंग सिख अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुके हैं। इस घटनाक्रम के साथ ही दोनों राज्यों की सीमा पर बना गतिरोध भी पूरी तरह समाप्त हो गया है।
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