खेती से औद्योगिक हब तक का सफर
जयपुर जिले के चौमूं क्षेत्र में बसा जैतपुरा गांव आज राज्य के लिए एक मिसाल बन गया है। एक समय था जब इस गांव की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खेती पर निर्भर थी, लेकिन आज यह इलाका एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र के रूप में स्थापित हो चुका है। विकास की इस दौड़ में जैतपुरा ने कृषि प्रधान पहचान को छोड़कर उद्योगों की राह पकड़ ली है।
1984 में रखी गई थी औद्योगिक आधारशिला
जैतपुरा को यह औद्योगिक पहचान रातों-रात नहीं मिली है। इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों की शुरुआत 1984 में की गई थी। समय के साथ यहां बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ और आज स्थिति यह है कि यहां 250 से अधिक लघु और मध्यम श्रेणी के उद्योग सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इन कारखानों ने गांव की तस्वीर पूरी तरह से बदलकर रख दी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे उत्पाद
इस गांव के कारखानों में तैयार होने वाला सामान न केवल भारत के विभिन्न कोनों में भेजा जा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी भारी मांग है। जैतपुरा में बनी उत्पादित वस्तुएं विशेष रूप से नेपाल और बांग्लादेश तक पहुंचाई जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों का विदेशों तक निर्यात होना इस गांव के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और सुविधाओं का विस्तार
औद्योगीकरण का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय युवाओं को मिला है। फैक्ट्रियों की स्थापना से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं, जिसके कारण गांव से शहरों की ओर होने वाला पलायन काफी हद तक कम हो गया है। इसके अलावा, औद्योगिक विकास के साथ-साथ क्षेत्र में जनसुविधाओं का भी तेजी से विस्तार हुआ है। आज जैतपुरा में:
- बेहतर शिक्षा के साधन उपलब्ध हैं।
- स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है।
- बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।
- सड़कों और संचार का आधुनिक नेटवर्क तैयार हुआ है।
इन सभी सुविधाओं ने जैतपुरा को एक आधुनिक और समृद्ध गांव की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है, जो अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
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