लखनऊ अग्निकांड के बाद हजारीबाग के कोचिंग संस्थानों में मचा हड़कंप, सुरक्षा मानकों पर उठे बड़े सवाल

लखनऊ में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद झारखंड के हजारीबाग में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़े इन संस्थानों में फायर सेफ्टी के इंतजाम नदारद होने से अभिभावकों में डर का माहौल है।

हजारीबाग में शिक्षा का बढ़ता केंद्र और सुरक्षा का संकट

झारखंड का हजारीबाग शहर वर्तमान में शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। राज्य के सुदूर इलाकों से हजारों की संख्या में छात्र यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डेरा डाले हुए हैं। शहर की तंग गलियों और बहुमंजिला इमारतों में सैकड़ों कोचिंग संस्थान संचालित किए जा रहे हैं। शहर में संचालित कोचिंग सेंटरों की कुल संख्या 200 से अधिक है, जहाँ रोजाना हजारों छात्र अपना भविष्य संवारने के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, इन परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लखनऊ हादसे ने दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हाल ही में हुए एक भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की दुखद मौत के बाद पूरे देश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। इस घटना ने हजारीबाग जैसे शैक्षणिक हब में भी डर का माहौल पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि यदि हजारीबाग के किसी कोचिंग सेंटर में अचानक आग लग जाती है, तो वहां मौजूद सैकड़ों छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए क्या पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। क्या वहां पर्याप्त अग्निशमन उपकरण मौजूद हैं या फिर छात्रों की जान भगवान भरोसे है।

कोचिंग सेंटरों की बदहाल स्थिति

जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो हजारीबाग के केवल एक या दो कोचिंग संस्थानों में ही फायर सेफ्टी के बुनियादी उपकरण दिखाई देते हैं। अधिकांश संस्थानों की स्थिति बेहद चिंताजनक है:

  • ज्यादातर कोचिंग सेंटरों में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) का घोर अभाव है।
  • आपातकालीन निकास मार्ग (इमरजेंसी एक्जिट) की सुविधा लगभग नगण्य है।
  • संकरे कमरों में 100 से अधिक छात्रों को एक साथ बैठाकर पढ़ाई कराई जाती है।
  • बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं हो रहा है।

ऐसी स्थितियों में किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में स्थानीय जिला प्रशासन का ढुलमुल रवैया भी कटघरे में है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर इन कोचिंग संस्थानों की औचक जांच की बात तो कही जाती रही है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई या सुरक्षा के कड़े नियम लागू होते नहीं दिखे हैं। हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती का इस विषय पर कहना है कि कोचिंग सेंटरों को रातों-रात बंद कर देना समस्या का हल नहीं है। प्रशासन का मानना है कि संस्थानों में सुरक्षा के सभी आवश्यक मानकों को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

अभिभावकों और छात्रों में गहरा आक्रोश

कोचिंग संस्थानों द्वारा अभिभावकों से मोटी फीस तो वसूली जाती है, लेकिन सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर उन्हें बुनियादी चीजें भी मुहैया नहीं कराई जाती हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए समझौता करने को मजबूर हैं, लेकिन क्या बच्चों की जान से बड़ा कोई कोचिंग कोर्स है। दूसरी ओर, कोचिंग में पढ़ने वाले छात्रों का भी यही हाल है। वे बताते हैं कि एक-एक क्लास में 70 से 80 छात्रों को बैठाकर पढ़ाया जाता है। कई सेंटर ऐसी संकरी गलियों में स्थित हैं, जहाँ आग लगने की स्थिति में दमकल की गाड़ियां तक नहीं पहुंच सकतीं। छात्रों ने मांग की है कि जिला प्रशासन को अब सख्ती बरतते हुए फायर सेफ्टी के सख्त नियम अनिवार्य करने चाहिए।

एसोसिएशन का पक्ष

कोचिंग एसोसिएशन हजारीबाग के सचिव डॉ. प्रकाश कुमार ने बताया कि इस मुद्दे पर वे लगातार सभी कोचिंग संचालकों के साथ बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। फिलहाल सभी संस्थानों में सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हजारीबाग में कोचिंग का यह कारोबार करोड़ों रुपये का है, लेकिन सुरक्षा मानकों के मामले में अभी भी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। प्रशासन और कोचिंग संचालकों को मिलकर छात्रों की सुरक्षा को लेकर ठोस पहल करनी होगी, ताकि भविष्य में लखनऊ जैसी किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

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