गौतम अडानी केस: अमेरिकी जज निकोलस गराउफिस ने न्याय विभाग से क्यों मांगा विस्तृत जवाब?

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा गौतम अडानी के खिलाफ केस वापस लेने की कोशिश पर संघीय जज निकोलस गराउफिस ने सवाल खड़े किए हैं। जज ने सरकार को आदेश दिया है कि वह इस फैसले के पीछे की ठोस वजह स्पष्ट करे।

अडानी मामले में नया मोड़

उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े अमेरिकी कानूनी मामले में अचानक एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। इस पूरे प्रकरण में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की भूमिका पर अब संघीय अदालत ने सवाल उठा दिए हैं। बीते मई महीने में न्याय विभाग ने कोर्ट को सूचित किया था कि वह गौतम अडानी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को आगे बढ़ाने का इच्छुक नहीं है। हालांकि, ब्रुकलिन की संघीय अदालत के जज निकोलस जॉर्ज गराउफिस ने इस मामले को यूं ही बंद करने से साफ इनकार कर दिया है। जज ने न्याय विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि वे 13 जुलाई तक विस्तार से जवाब दाखिल करें कि आखिर इस केस को वापस लेने का निर्णय क्यों लिया गया है।

कौन हैं जज निकोलस गराउफिस?

जज निकोलस जॉर्ज गराउफिस अमेरिका के सबसे अनुभवी संघीय न्यायाधीशों में से एक माने जाते हैं। 77 वर्षीय जज का जन्म 28 सितंबर 1948 को न्यू जर्सी में हुआ था। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि ग्रीक मूल की है और उनके दादा-दादी ग्रीस से आकर अमेरिका में बस गए थे। अपनी शिक्षा के दौरान उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि वकालत के पेशे में आने से पहले वे न्यूयॉर्क के सरकारी स्कूलों में शिक्षक के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने की थी नियुक्ति

कानूनी क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव हासिल करने के बाद, वर्ष 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने उन्हें न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट फेडरल कोर्ट का जज नियुक्त किया था। उनकी इस नियुक्ति को अमेरिकी सीनेट से सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी। साल 2014 में उन्होंने सीनियर जज के तौर पर नया पद संभाला, बावजूद इसके वे आज भी अत्यंत संवेदनशील और बड़े हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। जज गराउफिस अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और अतीत में वे ट्रंप प्रशासन को भी कई मुद्दों पर कड़ी फटकार लगा चुके हैं।

महत्वपूर्ण और चर्चित मामले

जज निकोलस गराउफिस का करियर कई ऐतिहासिक फैसलों से भरा रहा है। उन्होंने अपने न्यायिक कार्यकाल में अमेरिका के कई संवेदनशील केसों का निपटारा किया है:

  • NXIVM सेक्स कल्ट: यह उनके करियर का सबसे चर्चित मामला रहा, जिसमें संगठन के प्रमुख कीथ रेनियर को महिलाओं के शोषण और उन्हें ब्लैकमेल करके गुलाम बनाने का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई थी।
  • नस्लीय भेदभाव: न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट में नस्लीय भेदभाव के एक जटिल मामले में उन्होंने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला दिया, जिसने अश्वेत और हिस्पैनिक समुदाय के लोगों के लिए भर्ती के नए रास्ते खोल दिए।
  • प्रवासी युवाओं के अधिकार: उन्होंने ‘डिफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स’ (DACA) कार्यक्रम से जुड़े मामले में बेहद अहम आदेश दिया था, जिससे अमेरिका में रह रहे लाखों प्रवासी युवाओं को बड़ी राहत मिली थी।
  • माफिया सरगना: माफिया विन्सेंट बासियानो को उम्रकैद की सजा सुनाकर उन्होंने एक बड़ा न्यायिक संदेश दिया था।

अडानी केस पर जज की तीखी टिप्पणी

अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत को अपनी मंशा बताते हुए कहा था कि वह 2024 में दर्ज सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड के आरोपों वाले मामले को आगे नहीं ले जाना चाहता। लेकिन जज गराउफिस ने सरकार के इस रुख को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनका दिया गया बयान बहुत ही संक्षिप्त, सामान्य और निष्कर्षात्मक है। अदालत का मानना है कि उसे यह जानने का पूर्ण अधिकार है कि केस वापस लेने के पीछे की ठोस और वैधानिक वजह क्या है। इसी के चलते उन्होंने न्याय विभाग को आगामी 13 जुलाई तक विस्तृत हलफनामा पेश करने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

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