कानपुर की नई औद्योगिक उड़ान: 26500 MSME इकाइयों ने 68 हजार करोड़ के कारोबार का छुआ मुकाम

उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर अब MSME सेक्टर के जरिए अपनी पुरानी औद्योगिक साख को फिर से हासिल कर रहा है। पिछले पांच वर्षों में यहाँ की इकाइयों ने 68 हजार करोड़ रुपये का सालाना कारोबार कर विश्व के 30 देशों में अपने उत्पादों की धाक जमा दी है।

औद्योगिक मानचित्र पर कानपुर की नई वापसी

कभी कपड़ा मिलों और जूट उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध रहा कानपुर शहर एक बार फिर अपनी औद्योगिक खोई हुई पहचान को मजबूती से हासिल कर रहा है। इस बार इस बदलाव के पीछे कोई एक बड़ा उद्योग नहीं बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग यानी MSME सेक्टर की एक बड़ी फौज है। पिछले पांच वर्षों के दौरान कानपुर के औद्योगिक परिवेश में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। शहर में 26,500 से अधिक MSME इकाइयां अब न केवल स्थानीय बाजार की मांग पूरी कर रही हैं, बल्कि अपनी तकनीक और गुणवत्ता से देश-दुनिया में कारोबार का विस्तार भी कर रही हैं।

वैश्विक स्तर पर फैली कानपुर के उत्पादों की धमक

कानपुर के उद्यमियों का मानना है कि अब उनका दायरा सीमित नहीं रहा। यहाँ निर्मित उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर रहे हैं। लेदर, फुटवियर, सैडलरी, इंजीनियरिंग, पैकेजिंग, होजरी, टेक्सटाइल, बिस्किट, केमिकल, प्लास्टिक और फार्मा जैसे क्षेत्रों में निर्मित कानपुर के उत्पाद आज 30 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। इन देशों की सूची में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, इटली, रूस और ब्राजील जैसे बड़े बाजार शामिल हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि कानपुर के छोटे और मध्यम उद्योग अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

संकट को अवसर में बदलने का सफर

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन यानी IIA के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य के अनुसार, कोरोना जैसी वैश्विक आपदा के दौरान जब तमाम उद्योग लड़खड़ा गए थे, तब भी कानपुर का MSME सेक्टर डटा रहा। शुरुआती दौर में कारोबार के पूरी तरह ठप होने का अंदेशा था, लेकिन स्थानीय प्रशासन और उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय ने स्थिति को संभाल लिया। नतीजा यह हुआ कि इन पांच वर्षों में न केवल पुराने उद्योग बचे रहे, बल्कि उनकी संख्या में भी लगातार इजाफा होता गया। आज कानपुर में लोहिया, घड़ी, रेडटेप, रेड चीफ, एलन कूपर, गोल्डी, अशोक, पान पराग, एमकेयू, रिमझिम इस्पात और मोहिनी जैसे नामी ब्रांडों का संचालन इसी औद्योगिक मजबूती को दर्शाता है। इसके अलावा, अडाणी समूह, ताज होटल और वेद सैसोमैकेनिका जैसी बड़ी कंपनियों का आना यह संकेत देता है कि कानपुर में निवेशकों का विश्वास काफी बढ़ा है।

68 हजार करोड़ का सालाना कारोबार और रोजगार

आंकड़ों के नजरिए से देखें तो कानपुर की ये 26,500 MSME इकाइयां हर साल लगभग 68 हजार करोड़ रुपये का कारोबार कर रही हैं। शहर से हर वर्ष 10,500 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जाता है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ी जान फूंकने का काम कर रहा है। रोजगार के मोर्चे पर भी इन उद्योगों की भूमिका सराहनीय है। इन इकाइयों के माध्यम से करीब 2.60 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 1.25 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। इस सेक्टर की वार्षिक विकास दर सात से आठ प्रतिशत बनी हुई है, जो कानपुर की औद्योगिक गतिशीलता को बयां करती है।

विविधतापूर्ण औद्योगिक संरचना

कानपुर के औद्योगिक विस्तार की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है। यहाँ एक तरफ जहां चमड़ा और जूता-चप्पल उद्योग की पुरानी परंपरा जीवित है, वहीं दूसरी तरफ फ्लेक्सिबल पैकेजिंग उद्योग अकेले ही करीब पांच हजार करोड़ रुपये का कारोबार कर रहा है। इसके साथ ही हर साल तीन लाख टन से अधिक बिस्किट और छह लाख टन खाद्य तेल का उत्पादन शहर की औद्योगिक ताकत को और अधिक पुख्ता करता है। मसाले, डेयरी, बेकरी और फार्मा जैसे क्षेत्रों में भी शहर की प्रगति जारी है।

भविष्य के लिए तैयारी: घाटमपुर में नया औद्योगिक क्षेत्र

उद्योग विभाग कानपुर के औद्योगिक विस्तार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सक्रिय है। उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि विभाग अब बड़े पैमाने पर औद्योगिक विस्तार की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी क्रम में घाटमपुर में 62 एकड़ के विशाल क्षेत्र में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का कार्य प्रगति पर है। सरकार की ओडीओपी यानी एक जिला एक उत्पाद और ओडीओसी योजनाओं का लाभ भी नए उद्यमियों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य कानपुर के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और नए निवेशकों के लिए बुनियादी सुविधाओं को सुगम बनाना है। यदि वर्तमान सरकारी सहयोग और औद्योगिक निवेश का यह सिलसिला इसी प्रकार जारी रहा, तो निश्चित रूप से कानपुर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार स्तंभ बन जाएगा।

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