घोड़ा पछाड़ सांप: क्यों लोग इसे देखकर भागते हैं और इसे मारना क्यों है कानूनी जुर्म?

भारत में गर्मियों के दौरान धामन सांप का दिखना आम है, जिसे लोग अक्सर 'घोड़ा पछाड़' के नाम से जानते हैं। हालांकि इसे लेकर कई भ्रांतियां हैं, लेकिन असल में यह किसानों का मित्र है और इसे मारना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध है।

सांपों को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां

भारत में सांपों को लेकर हमेशा ही जिज्ञासा और डर का मिला-जुला माहौल रहता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि सांप की आयु कितनी होती है, कौन सा सांप जहरीला है और कौन सा बिना जहर का? इसके अलावा दूध पीने वाले सांपों के मिथक, सांपों की मांसाहारी प्रकृति और उनके द्वारा जानवरों को काटने जैसी तमाम बातें चर्चा का विषय बनी रहती हैं। जब गर्मियों का मौसम आता है, तो इंसान और सांप का आमना-सामना होने की घटनाएं अचानक बढ़ जाती हैं। ऐसे में ग्रामीण और शहरी इलाकों में एक खास सांप को लेकर काफी खौफ देखने को मिलता है, जिसे लोग घोड़ा पछाड़ या धामन के नाम से जानते हैं। अंग्रेजी में इसे इंडियन रैट स्नेक (Indian Rat Snake) कहा जाता है। इस सांप की लंबाई और इसकी फुर्ती अक्सर लोगों को डरा देती है, लेकिन इसके बारे में प्रचलित कई धारणाएं पूरी तरह से गलत हैं।

क्यों पड़ा इसका नाम घोड़ा पछाड़?

धामन को 'घोड़ा पछाड़' कहे जाने के पीछे का सबसे बड़ा कारण इसकी तूफानी रफ्तार है। भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले सांपों में यह सबसे तेज गति से रेंगने वाले जीवों में गिना जाता है। ग्रामीण इलाकों में यह अंधविश्वास गहरा है कि यह सांप इंसानों को देखकर उनके पीछे दौड़ पड़ता है और उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर परेशान करता है। हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह से एक भ्रम है। सच्चाई यह है कि धामन स्वभाव से बहुत ही शर्मीला और डरपोक जीव होता है। जब कोई इंसान अचानक इसके सामने आ जाता है, तो यह अपनी जान बचाने के लिए भागने का रास्ता तलाशता है। यदि उस दौरान कोई इंसान अनजाने में उसी तरफ खड़ा हो जहां सांप का बिल या सुरक्षित ठिकाना है, तो भ्रमवश ऐसा लगता है कि सांप इंसान की तरफ दौड़ा चला आ रहा है।

गर्मी के सीजन में कहां छिपा होता है यह सांप?

धामन सांप ठंडे खून वाले जीव होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे अपने शरीर का तापमान खुद नियंत्रित नहीं कर सकते। अत्यधिक गर्मी इनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। गर्मियों में खुद को ठंडा रखने के लिए ये अक्सर इंसानी बस्तियों के आसपास ऐसी जगहों को चुनते हैं जहां नमी और ठंडक मौजूद हो। इनके रहने के मुख्य स्थानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पुराने और कच्चे मिट्टी के घर।
  • सामान रखने वाले गोदाम और स्टोर रूम।
  • लकड़ियों के बड़े ढेर के नीचे की खाली जगह।
  • घर के बाथरूम और वाशबेसिन के नीचे का कोना।
  • पानी की टंकियों के आसपास की ठंडी जगहें।

इसके अलावा, चूहों की तलाश में ये सांप खेतों में फसलों के बीच और घने पेड़ों पर भी आसानी से चढ़ जाते हैं। यदि इन्हें किसी कोने में घेर लिया जाए या उन पर हमला करने की कोशिश की जाए, तो वे अपना बचाव करने के लिए गर्दन फुलाते हैं और पूंछ पटककर आवाज निकालते हैं। लेकिन उनका यह व्यवहार हमला करने के लिए नहीं, बल्कि खुद को सुरक्षित रखने के लिए होता है।

क्या धामन सांप वाकई खतरनाक है?

अक्सर लोग 8 से 10 फीट तक की लंबाई वाले इस सांप को देखकर घबरा जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह इंसानों के लिए बिल्कुल भी खतरनाक नहीं है। घोड़ा पछाड़ या धामन पूरी तरह से गैर-विषैले यानी बिना जहर वाले सांप होते हैं। इनके काटने से किसी भी इंसान की मृत्यु होने की संभावना शून्य है। इनका मुख्य हथियार जहर नहीं, बल्कि चूहों को दबोचने की उनकी गजब की फुर्ती और शारीरिक ताकत होती है। यह लेख केवल आपकी सुरक्षा और बेहतर जानकारी के लिए है ताकि आप इन जीवों के प्रति सही दृष्टिकोण रख सकें।

कानूनी स्थिति और पर्यावरण में महत्व

भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत धामन सांप को पूरी सुरक्षा प्राप्त है। इसलिए, किसी भी स्थिति में इसे मारना एक गंभीर कानूनी अपराध है। धामन को वास्तव में पर्यावरण और किसानों का सबसे बड़ा मित्र माना जाता है। खेतों और अनाज के गोदामों में चूहों की संख्या को नियंत्रित करने में यह सांप अहम भूमिका निभाता है। यदि यह सांप घर के आसपास दिखाई दे, तो घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखना चाहिए। इसे मारने का प्रयास करने के बजाय तुरंत स्थानीय वन विभाग या प्रमाणित स्नेक सेवर टीम को सूचित करना चाहिए। यह जीव पर्यावरण की खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) को संतुलित बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

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