स्कूली छात्रों की बड़ी उपलब्धि
भारत का स्टार्टअप जगत अब केवल अनुभवी उद्यमियों तक सीमित नहीं रह गया है। आज देश के 16 साल के स्कूली छात्र भी अपनी रचनात्मक सोच और ठोस बिजनेस आइडिया के जरिए दुनिया भर के निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। इसी क्रम में जयपुर के जयश्री पेरीवाल इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले तीन होनहार छात्रों, अव्याना मेहता, एरियाना अग्रवाल और विवान छाछरिया ने मिलकर एक अनोखे ग्रीन स्टार्टअप की शुरुआत की है, जिसका नाम प्लास स्टिक रखा गया है।
कैसे काम करता है यह स्टार्टअप
इस युवा टीम ने एक विशेष प्रकार का चुंबकीय पाउडर तैयार किया है, जिसे इमली के बेकार बीजों से बनाया जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना बिजली के पानी में मौजूद 100 प्रतिशत खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक्स को सफलतापूर्वक बाहर निकालने की क्षमता रखता है। यह नवाचार न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि बेहद किफायती भी है, जो इसे बाजार में अन्य महंगे विकल्पों से अलग बनाता है।
बढ़ती समस्या का समाधान
देश के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में लोग आज भी पीने के पानी के भंडारण के लिए बड़े प्लास्टिक कंटेनरों पर निर्भर हैं। इन बर्तनों से पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स घुल जाते हैं, जो मनुष्य के रक्त, फेफड़ों और अन्य महत्वपूर्ण अंगों में पहुंचकर गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में बिजली की कमी और महंगे वाटर प्यूरीफायर की अनुपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रेरणा और भविष्य की योजना
इस समस्या को इन तीनों छात्रों ने एक फील्ड विजिट के दौरान करीब से देखा और महसूस किया। उन्होंने इसे महज एक पर्यावरण संबंधी चिंता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक अवसर के रूप में देखा। इस विजन के साथ उन्होंने प्रयोगशाला में शोध करने से लेकर अपनी मार्केटिंग रणनीति तैयार करने तक का पूरा खाका तैयार किया है। आज उनका यह स्टार्टअप न केवल अपनी उपयोगिता सिद्ध कर रहा है, बल्कि भविष्य में दुनिया भर के क्लीन टेक सेक्टर और बड़े वेंचर कैपिटलिस्ट्स को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता भी रखता है।
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