नई कार या बाइक लेते ही क्या PUC सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य है? 90 प्रतिशत लोग नहीं जानते सही नियम

नई गाड़ी खरीदने के बाद प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र यानी PUC को लेकर अक्सर वाहन चालकों में भ्रम रहता है। जानिए सरकारी नियमों के अनुसार आपको नई गाड़ी के लिए कब और क्यों PUC की जरूरत पड़ती है।

नई गाड़ी और PUC का पेंच

जब आप उत्साह के साथ शोरूम से अपनी नई कार या मोटरसाइकिल घर लाते हैं, तो गाड़ी के दस्तावेजों को लेकर कई तरह के सवाल मन में आते हैं। इनमें से सबसे प्रमुख सवाल यह होता है कि क्या नई गाड़ी मिलते ही तुरंत प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC बनवाना जरूरी है? सड़क पर चलने वाले 90 प्रतिशत वाहन मालिक इस नियम से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। हकीकत यह है कि सरकार ने नए वाहनों के मालिकों को इस मामले में कुछ विशेष राहत प्रदान की है, लेकिन यह छूट केवल एक सीमित समय के लिए ही प्रभावी होती है।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम क्या कहते हैं?

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, जिसे संक्षेप में CMVR 1989 कहा जाता है, के प्रावधानों के अनुसार, जब आप कोई भी नई कार या बाइक खरीदते हैं, तो आपको उसके प्रदूषण प्रमाणपत्र को लेकर तत्काल चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। वास्तव में, शोरूम से गाड़ी बिकने के समय ही कंपनी यह सुनिश्चित करती है कि गाड़ी तय किए गए कड़े प्रदूषण मानकों पर खरी उतरे। इस वजह से, नई गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की तारीख से लेकर अगले 12 महीने यानी पूरे एक साल तक आपको अलग से कोई भी PUC बनवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इस अवधि के दौरान कंपनी द्वारा उपलब्ध कराया गया प्रारंभिक सर्टिफिकेट ही पूरी तरह से वैध माना जाता है।

एक साल पूरा होने के बाद की स्थिति

जैसे ही आपकी गाड़ी को सड़क पर उतरे हुए एक साल का समय बीत जाता है, सरकारी छूट की अवधि स्वतः समाप्त हो जाती है। इसके बाद गाड़ी मालिक की यह जिम्मेदारी बन जाती है कि वह किसी भी निकटतम अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र पर जाकर अपने वाहन की जांच करवाए। एक साल बाद, आपको समयबद्ध तरीके से इस प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य हो जाता है। यदि आपकी गाड़ी एक साल से अधिक पुरानी है, तो आमतौर पर जारी किए गए PUC सर्टिफिकेट की वैधता 6 महीने की होती है। हालांकि, आधुनिक तकनीक वाली BS-IV और BS-VI मानक वाली गाड़ियों के मामले में, कई राज्यों ने इस वैधता को बढ़ाकर 1 साल तक करने की सुविधा दी है, ताकि वाहन मालिकों को बार-बार केंद्र के चक्कर न काटने पड़ें।

नियमों की अनदेखी का परिणाम

बहुत से वाहन चालक यह मानकर लापरवाही बरतते हैं कि मामूली बात है, लेकिन यह गलती आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत, यदि आप वैध PUC सर्टिफिकेट के बिना गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाते हैं, तो आपको 10,000 रुपये तक का तगड़ा जुर्माना भरना पड़ सकता है। केवल आर्थिक दंड ही नहीं, बल्कि स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ट्रैफिक पुलिस के पास यह अधिकार होता है कि वे नियमों का उल्लंघन करने पर आपका ड्राइविंग लाइसेंस भी 3 महीने की अवधि के लिए निलंबित कर दें।

सुरक्षित रहने का सही तरीका

कानूनी झंझटों और भारी जुर्माने से बचने का सबसे सरल उपाय यही है कि आप अपने वाहन की फिटनेस और प्रदूषण स्तर पर नजर रखें। जैसे ही आपकी गाड़ी की प्रारंभिक छूट समाप्त होने वाली हो, अपने कैलेंडर में रिमाइंडर सेट करें और समय रहते पास के अधिकृत केंद्र से जांच करवा लें। यह न केवल कानून का सम्मान है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा के लिए भी एक नागरिक का कर्तव्य है। नई गाड़ी की चमक के साथ-साथ उसके जरूरी कागजों का अपडेट रहना ही एक जिम्मेदार चालक की पहचान है।

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