कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर सरकार की चेतावनी
अगर आप इस साल पवित्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है जो इस आध्यात्मिक यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं। हाल ही में देखने में आया है कि कई तीर्थयात्री निजी टूर ऑपरेटरों के भरोसे बिना पूरे दस्तावेजों के यात्रा पर निकल गए, जिसके कारण उन्हें नेपाल में बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। वे अपनी यात्रा पूरी करने में नाकाम रहे और अंत में उन्हें विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगानी पड़ी।
दस्तावेजों के बिना यात्रा करना पड़ सकता है महंगा
मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि तीर्थयात्रियों को तब तक भारत से अपनी यात्रा की शुरुआत नहीं करनी चाहिए, जब तक उनके पास सभी जरूरी ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स, चीन का वैध वीजा और वहां प्रवेश के लिए अनिवार्य एंट्री परमिट मौजूद न हो। कई बार श्रद्धालु इस उम्मीद में यात्रा शुरू कर देते हैं कि उन्हें आगे जाकर या बॉर्डर पर दस्तावेज मिल जाएंगे, लेकिन ऐसा करना उनके लिए भारी संकट का कारण बन सकता है। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन या नेपाल में फंसने जैसी स्थिति से बचने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
पंजीकृत टूर ऑपरेटरों का ही करें चुनाव
विदेश मंत्रालय ने यात्रियों को सलाह दी है कि यात्रा के लिए किसी भी अनजान या अनधिकृत व्यक्ति के बजाय हमेशा विधिवत पंजीकृत और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त टूर ऑपरेटरों की ही मदद लें। गैर-पंजीकृत ऑपरेटरों के साथ यात्रा करने पर न केवल दस्तावेजों में गड़बड़ी की संभावना बनी रहती है, बल्कि ठहरने, खाने और अन्य यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं में भी यात्री मुश्किल में पड़ सकते हैं। एक विश्वसनीय और आधिकारिक टूर ऑपरेटर चुनना आपकी सुरक्षा और यात्रा की सफलता के लिए अनिवार्य है।
विक्रम दोरईस्वामी ने दी महत्वपूर्ण सलाह
चीन में तैनात भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने भी तीर्थयात्रियों के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास की टीम ने कैलाश पर्वत के परिक्रमा मार्ग, आधिकारिक प्रवेश बिंदुओं, वहां के होटलों, रसोई घरों, यात्रियों के ठहरने की जगह और चिकित्सा सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय तीर्थयात्रियों को वहां बेहतर सुविधाएं मिल सकें। राजदूत ने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष पारंपरिक तिब्बती और चीनी कैलेंडर के हिसाब से एक विशेष धार्मिक वर्ष है। इस कारण से कैलाश क्षेत्र में स्थानीय श्रद्धालुओं की भी भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। इसलिए, यात्रियों को अतिरिक्त धैर्य रखने और विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
उत्तराखंड के रास्ते यात्रा की तैयारियां
जहां एक तरफ दस्तावेज संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं, वहीं उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भी तैयारियां आखिरी दौर में चल रही हैं। इस साल का पहला जत्था 4 जुलाई को उत्तराखंड पहुंचेगा। इस मार्ग से कुल 10 जत्थे यात्रा करेंगे, जिनमें प्रत्येक जत्थे में 50-50 श्रद्धालु शामिल होंगे। यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि उन्हें अब केवल 38 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी होगी। यात्रा का शेष अधिकांश हिस्सा वाहनों के जरिए पूरा किया जा सकेगा, जिससे श्रद्धालुओं की थकान कम होगी और यात्रा पहले की तुलना में अधिक सरल और सुगम हो जाएगी। विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर दोहराया है कि कैलाश मानसरोवर जैसी कठिन और संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों वाली यात्रा पर निकलने से पहले सभी आधिकारिक औपचारिकताएं पूरी करना और अधिकृत माध्यमों का पालन करना ही सबसे सुरक्षित और बुद्धिमानी भरा विकल्प है।
https://hindi.news18.com/news/nation/planning-kailash-mansarovar-yatra-need-to-always-keep-these-documents-mea-issues-advisory-after-indians-get-stranded-in-nepal-10609057.html