पीएमसीएच प्राचार्य विवाद में आया ताजा अपडेट
बिहार की राजधानी पटना स्थित पीएमसीएच के पूर्व प्राचार्य डॉ एनपी सिंह को उनके पद से हटाए जाने का विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में बिहार स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने इस बार मामले में डॉ एनपी सिंह के साथ तैनात रहे सरकारी अंगरक्षक के बयानों को आधार बनाते हुए अपनी कार्रवाई को उचित ठहराया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी इस पूरे प्रकरण पर पहली बार विस्तार से बात करते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य का कोई भी कदम पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उठाया जाएगा।
सरकारी अंगरक्षक का बयान और विभाग का दावा
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई दूसरी प्रेस विज्ञप्ति में मामले की बारीकियों को रखा गया है। विभाग का कहना है कि जांच के दौरान डॉ एनपी सिंह के साथ तैनात सरकारी अंगरक्षक संजीत कुमार का बयान दर्ज किया गया था, जिसमें 23 जून की गतिविधियों का सिलसिलेवार वर्णन दिया गया है। विज्ञप्ति के अनुसार, संजीत कुमार ने अपने बयान में बताया कि वह उस दिन सुबह करीब 9.30 बजे डॉ एनपी सिंह के निजी क्लिनिक पहुंच गए थे।
अंगरक्षक के अनुसार, डॉ एनपी सिंह सुबह लगभग 11 बजे अपने घर के ऊपरी हिस्से से नीचे बने क्लिनिक में आए और उन्होंने मरीजों को देखना शुरू किया। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शाम करीब 6 बजे तक वे लगातार मरीजों का उपचार करते रहे। इस अवधि के दौरान लगभग 15 से 20 मरीज इलाज के लिए क्लिनिक पर आए थे। अंगरक्षक ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि सुबह 9.30 बजे से लेकर शाम 6.30 बजे तक डॉ एनपी सिंह कहीं बाहर नहीं गए और वे पूरे समय उनके साथ ही मौजूद थे। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी कर्तव्य के समय वे निजी कार्य में व्यस्त थे, जिसे विभाग ने प्रशासनिक लापरवाही माना है।
उच्च स्तरीय जांच और न्याय का आश्वासन
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भले ही प्रारंभिक जांच में तथ्य डॉ एनपी सिंह के खिलाफ पाए गए हों, लेकिन मामला अभी पूरी तरह से सुलझा नहीं है। इसे उच्च स्तरीय जांच के अधीन रखा गया है। विभाग ने कहा है कि जांच की प्रक्रिया के दौरान डॉ एनपी सिंह को अपनी बात रखने और अपना पक्ष पूरी तरह स्पष्ट करने का पर्याप्त मौका दिया जाएगा। कोई भी अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आने और सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा। विभाग का स्पष्ट कहना है कि तथ्यों की पुष्टि करना और पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का रुख
इस पूरे मामले पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अपना पक्ष रखते हुए पूरी घटना की पृष्ठभूमि साझा की है। मंत्री के अनुसार, उन्होंने 22 जून को ही पीएमसीएच के अधीक्षक से बातचीत कर उन्हें अपने निरीक्षण के बारे में पूर्व सूचना दे दी थी। बावजूद इसके, जब वे निरीक्षण के लिए अस्पताल पहुंचे, तो प्राचार्य अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं थे।
मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर होने के नाते, प्राचार्य की अनुपस्थिति को उन्होंने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि यदि प्राचार्य अवकाश पर थे, तो इसकी सूचना विधिवत रूप से विभाग या उच्च अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी, जो कि नहीं की गई। इसी आधार पर उन्होंने एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। मंत्री के मुताबिक, यह समिति पूरी निष्पक्षता के साथ सभी पहलुओं की गहराई से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
भविष्य की कार्रवाई पर मंत्री का बयान
स्वास्थ्य मंत्री ने दोहराया है कि सरकार के लिए अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की देखभाल सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी। मंत्री ने यह आश्वासन भी दिया है कि इस पूरी प्रक्रिया में न्याय के सभी सिद्धांतों का पालन किया जाएगा और डॉ एनपी सिंह को भी अपनी बात रखने का पूरा अवसर प्रदान किया जाएगा। वर्तमान में कार्रवाई का आधार जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा और उपलब्ध साक्ष्य हैं। यह पूरा मामला आने वाले समय में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनुशासन के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अस्पताल प्रशासन में किसी भी प्रकार की चूक को लेकर सरकार अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को लेकर स्पष्ट है।
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