रणथंभौर में 5वें इंटरनेशनल टाइगर वीक का भव्य आगाज, बाघ संरक्षण पर मंथन

राजस्थान के सवाई माधोपुर में तीन दिवसीय रॉयल इंटरनेशनल टाइगर वीक की शुरुआत हुई, जिसमें दुनिया भर के विशेषज्ञ बाघों के संरक्षण और उनके आवास की सुरक्षा के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं।

रणथंभौर में बाघों के संरक्षण पर वैश्विक मंथन

बाघों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास के संवर्धन को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से सवाई माधोपुर के रणथंभौर में 5वें रॉयल इंटरनेशनल टाइगर वीक का शानदार आगाज हुआ है। आमाघाटी वाइल्डलाइफ रिज़ॉर्ट और कैसल झूमर बावड़ी में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य विषय कंजर्व इंडियाज़ फाइनेस्ट टाइगर्स रखा गया है। इस आयोजन में देश-विदेश के कई वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और पर्यावरण प्रेमी एक मंच पर जुटे हैं, ताकि बाघ संरक्षण, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण के सतत विकास पर गंभीर चर्चा की जा सके।

उद्घाटन सत्र और विशेषज्ञों की राय

इस कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश धर्मेश शर्मा के संबोधन के साथ हुई। पहले दिन के सत्रों में भारत में बाघों की वर्तमान स्थिति और उनके भविष्य को लेकर मंथन किया गया। प्रसिद्ध कंजर्वेशन इकोलॉजिस्ट, लेखिका और फोटोग्राफर डॉ. लतिका नाथ ने भारत के बाघों के संकट और उनके पुनरुद्धार की दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल, भूटान, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीकी देशों के संरक्षण मॉडल से सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पर्यटन को बढ़ावा देना काफी नहीं है, बल्कि प्रभावी मॉनिटरिंग के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या को सीमित करना और पर्यटन से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा संरक्षण कार्यों में खर्च करना अनिवार्य है।

विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन

वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष और सीईओ डॉ. अनिश अंधेरिया ने चर्चा के दौरान बताया कि आर्थिक विकास के नाम पर पर्यावरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सड़कों, रेलवे लाइनों और पुलों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारों के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि रेलवे लाइनों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए और सायरन सिस्टम जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए। डॉ. अंधेरिया ने यह भी रेखांकित किया कि बाघ न केवल जैव विविधता के रक्षक हैं, बल्कि वे जल संसाधनों की सुरक्षा और हाइड्रोलॉजी बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

सम्मान और पुरस्कार समारोह

इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों और संस्थानों को सम्मानित किया जाएगा। विभिन्न श्रेणियों में दिए जाने वाले प्रमुख पुरस्कारों में टाइगर रिजर्व ऑफ द ईयर, वाइल्डलाइफ लीडरशिप अवॉर्ड, एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड और जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर शामिल हैं। इन पुरस्कारों के लिए विजेताओं का चयन एक विशेषज्ञ जूरी द्वारा किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता पूर्व राज्यपाल वी. पी. सिंह बदनौर करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल चुनौतियों को उजागर करना है, बल्कि भविष्य के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना भी है जिससे बाघों का अस्तित्व सुरक्षित रह सके।

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