चीन के रेगिस्तान में छिपे हैं अमेरिकी युद्धपोत के निशान
चीन एक बार फिर अपनी आक्रामक सैन्य तैयारियों और नई रणनीतियों के कारण वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों से एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि चीन ने उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत के विस्तृत रेगिस्तानी इलाके में अमेरिकी नौसेना के एक बड़े युद्धपोत की हूबहू 3D प्रतिकृति तैयार की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नकली जहाज का उपयोग चीनी सेना द्वारा अपने हथियारों और मिसाइल प्रणालियों को और अधिक घातक बनाने तथा उनके निशाने की सटीकता को परखने के लिए किया जा रहा है।
अरले बुर्के क्लास डिस्ट्रॉयर पर चीन की नजर
यह 3D मॉडल अमेरिकी नौसेना के अरले बुर्के क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर जैसा दिखाई देता है। सैन्य जगत में इन युद्धपोतों को दुनिया के सबसे शक्तिशाली और आधुनिक जहाजों में गिना जाता है। ये जहाज मुख्य रूप से विमानवाहक पोतों को सुरक्षा प्रदान करने, हवाई रक्षा करने और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता रखते हैं। चीन का इस विशेष श्रेणी के जहाज का मॉडल बनाना सीधे तौर पर अमेरिका की नौसैनिक ताकत को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा
इस पूरे मामले का पता सबसे पहले ताइवान के ओपन-सोर्स रिसर्चर जोसेफ वेन ने लगाया। उन्होंने 11 मई को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के दौरान इस 3D मॉडल की पहचान की। इससे पहले 1 फरवरी की तस्वीरों में इस निर्माण कार्य की शुरुआती रूपरेखा दिखाई दे रही थी। यह नकली युद्धपोत चीन के रुआओकियांग स्थित पीएलए मिसाइल टेस्टिंग एरिया के भीतर बनाया गया है। इस इलाके की एक और खास बात यह है कि यहां करीब 23 मील लंबा रेल ट्रैक बिछाया गया है, ताकि इन नकली जहाजों को अलग-अलग स्थितियों में रखकर मिसाइलों का परीक्षण किया जा सके।
3D मॉडल की तकनीक और रणनीति
चीन ने पहले भी टकलामकान रेगिस्तान में अमेरिकी युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियर के कई 2D मॉडल बनाए हैं, लेकिन यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी वॉरशिप का विस्तृत 3D मॉडल सामने आया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन मॉडलों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए जा सकते हैं, जो अमेरिकी जहाजों के रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल की हूबहू नकल करते हैं। इससे चीन को अपनी मिसाइल और रडार प्रणालियों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुकूल जांचने में मदद मिलती है।
अमेरिका और ताइवान के लिए स्पष्ट संदेश
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, चीन का यह कदम केवल सामान्य सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को एक गंभीर संदेश भी है। चीन यह जताना चाहता है कि वह जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाने और उन्हें नष्ट करने की अपनी क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। यह पूरी तैयारी मुख्य रूप से ताइवान को लेकर बढ़ते सैन्य तनाव से जुड़ी मानी जा रही है। चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है, जबकि ताइवान स्वयं को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश के रूप में देखता है। यदि भविष्य में दोनों के बीच संघर्ष की स्थिति बनती है, तो अमेरिका अपनी नौसेना और विमानवाहक पोतों के जरिए ताइवान का समर्थन कर सकता है। इसी संभावना को देखते हुए चीन अभी से अमेरिकी जहाजों को मात देने की रणनीति तैयार कर रहा है।
सरकारी इमारतों और लड़ाकू विमानों के भी मॉडल
जांच में यह भी सामने आया है कि चीन सिर्फ युद्धपोतों तक ही सीमित नहीं है। अन्य सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में चीन ने अमेरिकी F-35 और F-22 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के भी डमी मॉडल तैयार किए हैं। इतना ही नहीं, ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय और वहां की अन्य महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों की प्रतिकृतियां बनाकर भी चीन अपने सैनिकों को निशाना लगाने का अभ्यास करा रहा है, जो क्षेत्र में बढ़ रहे खतरे के संकेतों को दर्शाता है।
https://hindi.news18.com/world/china-china-constructed-3d-replica-of-a-large-us-navy-warship-in-the-desert-for-target-training-10608662.html