भविष्य की उड़ान के लिए तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन एक ऐसी परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है जो भविष्य की यात्राओं को पूरी तरह बदल कर रख देगी। भविष्य की एयर टैक्सी और नई पीढ़ी के अत्याधुनिक विमानों के परीक्षण के लिए अमेरिका में एक विशाल और अत्याधुनिक टेस्टिंग सेंटर तैयार किया जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ओक्लाहोमा सिटी में स्थित माइक मोनरोनी एयरोनॉटिकल सेंटर के भीतर विकसित किया जा रहा है, जो आने वाले समय में विमानन क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
विशालकाय बेस और उसकी खूबियां
यह टेस्टिंग सेंटर करीब 1100 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इस प्रोजेक्ट के तहत 8.3 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम लागत से एक विशेष टेस्टिंग क्षेत्र का निर्माण किया जा रहा है, जिसे V-PAR नाम दिया गया है। यह केंद्र विशेष रूप से इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड विमानों की उड़ान और उनकी सुरक्षा को परखने के लिए बनाया जा रहा है। ओक्लाहोमा के विल रोजर्स वर्ल्ड एयरपोर्ट के निकट स्थित इस सुविधा में विमानों के लिए खास टेक-ऑफ और लैंडिंग पैड, टैक्सीवे और आधुनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, यहां एक विशेष निगरानी केंद्र भी स्थापित होगा ताकि विमानों की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखी जा सके।
सुरक्षा और अनुसंधान पर जोर
अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) का मानना है कि यह सेंटर भविष्य के हवाई यातायात को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि कैसे एयर टैक्सी और अन्य आधुनिक उड़ने वाले वाहनों को देश के मौजूदा व्यस्त हवाई क्षेत्र में सुरक्षित तरीके से एकीकृत किया जाए। यहां न केवल नए विमानों पर गहन शोध किया जाएगा, बल्कि पायलटों और इंजीनियरों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस प्रोजेक्ट के 2027 की गर्मियों तक पूरा होने की पूरी उम्मीद है। भविष्य में इसकी क्षमताओं का विस्तार करते हुए इसमें और अधिक लैंडिंग पैड और छोटे रनवे जोड़े जाने की भी योजना है।
2030 तक का मिशन
अमेरिकी सरकार पहले ही एडवांस्ड एयर मोबिलिटी की अपनी राष्ट्रीय रणनीति सार्वजनिक कर चुकी है। इस नीति का लक्ष्य 2030 तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एयर टैक्सी जैसी सेवाओं को आम जनता के लिए शुरू करना है। इसके साथ ही, 2035 तक पूरी तरह से ऑटोनॉमस यानी बिना पायलट के उड़ने वाले विमानों के संचालन का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि एयर टैक्सी के आने से यात्रा का समय कम होगा, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं सुदूर इलाकों तक तेजी से पहुंचेंगी और सामान की डिलीवरी व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।
eVTOL विमानों का दौर
इन नई पीढ़ी के वाहनों को eVTOL यानी इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग विमान कहा जाता है। ये विमान हेलीकॉप्टर की भांति बिना रनवे की आवश्यकता के सीधे आसमान में उड़ान भर सकते हैं और सुरक्षित नीचे उतर सकते हैं। इन्हें बैटरी, हाइब्रिड इलेक्ट्रिक सिस्टम या भविष्य में हाइड्रोजन फ्यूल सेल जैसी अत्याधुनिक ऊर्जा प्रणालियों से संचालित किया जाएगा। अमेरिका में इस तकनीक पर आधारित आठ पायलट प्रोजेक्ट पहले से ही गति पकड़ चुके हैं। साथ ही, नासा भी इस क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है। नासा का अनुमान है कि 2030 तक एयर टैक्सी का उद्योग एक विशाल बाजार के रूप में उभरकर सामने आएगा। हालांकि, वैज्ञानिक इस बात पर भी गंभीरता से अध्ययन कर रहे हैं कि इन विमानों के शोर का आम लोगों, पक्षियों और हमारे पर्यावरण पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा।
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