सामरिक दृष्टि से अहम है भारत का मिशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐतिहासिक यात्रा के तहत सेशेल्स में कदम रखा है। यह दौरा महज एक औपचारिकता नहीं बल्कि भारत की 'विजन महासागर' नीति का एक अहम हिस्सा है। नक्शे पर दिखने में बहुत छोटा सा यह देश हिंद महासागर की सुरक्षा के लिए किसी किले से कम नहीं है। भारत का मुख्य उद्देश्य इस द्वीप राष्ट्र के साथ संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना है ताकि समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाया जा सके।
चीन की दादागीरी पर लगाम की रणनीति
चीन लंबे समय से हिंद महासागर में अपने स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स प्लान के जरिए भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। सेशेल्स की भौगोलिक स्थिति दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार और तेल मार्गों के मुहाने पर है। यहां मौजूदगी का मतलब है कि भारत इन अहम रास्तों पर पूरी तरह नजर रख सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का एक बड़ा लक्ष्य चीन की बढ़ती आक्रामकता और उसकी विस्तारवादी नीतियों को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
डिफेंस और रडार सिस्टम पर खास जोर
इस यात्रा के दौरान 'विजन महासागर' के तहत भारत और सेशेल्स के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर काम होगा। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- डिफेंस यानी रक्षा सहयोग को और अधिक गहरा बनाना।
- इंटेलिजेंस शेयरिंग के जरिए संवेदनशील सूचनाओं का आदान प्रदान।
- कोस्टल सर्विलांस रडार सिस्टम को अपग्रेड और मजबूत करना।
इन कदमों से हिंद महासागर से गुजरने वाले चीनी नौसेना के जहाजों और उनकी संदिग्ध गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखना भारत के लिए आसान हो जाएगा। इस रडार नेटवर्क की मदद से भारत इस पूरे समुद्री इलाके में अपनी निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ा सकेगा, जिससे देश के दुश्मनों की किसी भी हरकत को समय रहते नाकाम किया जा सकेगा।
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