पूर्वांचल में धान की खेती पर गहराता संकट
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में इस समय भीषण गर्मी और मॉनसून की अत्यधिक देरी ने कृषि के क्षेत्र में एक विकट स्थिति पैदा कर दी है। धान की रोपाई कर चुके किसान इस समय दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। एक तरफ जहां आकाश से आग बरस रही है, वहीं दूसरी तरफ बारिश की बूंदों के लिए तरस रहे खेतों ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। धान की फसल के लिए शुरुआती दौर में नमी की जो आवश्यकता होती है, वह पूरी न होने से फसल के सूखने का खतरा मंडराने लगा है।
सिंचाई का बढ़ता बोझ और जलस्तर की मार
खेतों में धान की बुवाई और रोपाई के बाद भी पर्याप्त बारिश न होने के कारण किसानों को बार-बार सिंचाई का सहारा लेना पड़ रहा है। चिलचिलाती धूप के कारण खेतों की मिट्टी में तेजी से नमी खत्म हो रही है और कई स्थानों पर जमीन में बड़ी दरारें दिखने लगी हैं। किसान बिट्टू, जो गोरखपुर के सहजनवा क्षेत्र के पुड़ा गांव के निवासी हैं, बताते हैं कि उन्होंने इस बार विशेष रूप से कम पानी की खपत वाली धान की किस्म का चुनाव किया था। उनका मुख्य उद्देश्य सिंचाई के खर्च को कम रखना था, लेकिन भीषण गर्मी ने इस प्रयोग को भी पूरी तरह विफल कर दिया है।
बिट्टू के अनुसार, पानी देने के कुछ ही घंटों बाद खेत फिर से सूखे नजर आने लगते हैं, जिससे बार-बार पंप चलाने की विवशता बनी हुई है। डीजल से चलने वाले पंपों के उपयोग से खेती की लागत में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। इसके अतिरिक्त, भूजल स्तर के नीचे चले जाने के कारण पंप को अधिक समय तक चालू रखना पड़ता है, जिससे डीजल और बिजली दोनों का खर्च बढ़ गया है। यह आर्थिक बोझ छोटे और मध्यम स्तर के किसानों की कमर तोड़ने के लिए पर्याप्त है।
क्या उत्पादन पर पड़ेगा बुरा असर?
कृषि विशेषज्ञों की राय में धान की फसल के प्रारंभिक विकास के लिए नमी सबसे महत्वपूर्ण कारक है। यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश नहीं होती है, तो किसानों को मजबूरन और अधिक सिंचाई करनी होगी, जिससे लागत का आंकड़ा काफी ऊपर चला जाएगा। किसानों को अब केवल मॉनसून की अच्छी बारिश का ही सहारा है। उनका कहना है कि यदि फसल की कटाई तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहा, तो न केवल खेती महंगी हो जाएगी, बल्कि धान का कुल उत्पादन भी काफी घट सकता है। फसल के सूखने की संभावना ने पहले ही किसानों को आर्थिक तंगी की चिंता में डाल दिया है।
किसान क्यों हैं इतने परेशान?
धान के किसानों के सामने वर्तमान में मुख्य रूप से ये चुनौतियां सामने आ रही हैं:
- सिंचाई की लागत: बार-बार पंप चलाने से डीजल और बिजली का खर्च सामान्य से कई गुना बढ़ गया है।
- किस्मों का विफल होना: कम पानी में पकने वाली धान की उन्नत किस्में भी अत्यधिक तापमान को झेलने में असमर्थ हो रही हैं।
- मिट्टी की स्थिति: तेज धूप के कारण खेत में दरारें पड़ रही हैं, जिससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच रहा है।
- भूजल स्तर: पानी का स्तर नीचे गिरने से सिंचाई के संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात ने धान की खेती को एक महंगा सौदा बना दिया है। यदि समय रहते मौसम में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में किसानों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। किसान इस उम्मीद में आकाश की ओर देख रहे हैं कि जल्द ही झमाझम बारिश होगी और उनकी कड़ी मेहनत से लगाई गई फसल को जीवनदान मिल सकेगा।
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