अमेठी में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा: 10 साल से शिक्षक बनकर सरकारी खजाना लूट रहा था शख्स, बर्खास्तगी के बाद अब होगी रिकवरी

उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक फर्जी शिक्षक का पर्दाफाश हुआ है जो 10 साल से नकली दस्तावेजों के सहारे नौकरी कर रहा था। शिक्षा विभाग ने अब उसे बर्खास्त कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और वेतन की रिकवरी करने का आदेश दिया है।

फर्जीवाड़े का खुलासा और विभाग में हड़कंप

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति पिछले 10 वर्षों से पूरी तरह फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के दम पर सरकारी शिक्षक के पद पर तैनात था। जब इस फर्जीवाड़े की परतें खुलीं, तो शिक्षा विभाग के अधिकारी दंग रह गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए संबंधित शिक्षक को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। यह शिक्षक जामो ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय रानीपुर में अपनी सेवाएं दे रहा था। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।

साल 2016 में हुई थी नियुक्ति

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी शिक्षक का नाम सत्य प्रकाश मिश्र है। उनकी नियुक्ति साल 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित 15 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत हुई थी। नौकरी में आने के बाद से ही उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को लेकर विभाग को कुछ शिकायतें मिलने लगी थीं। इन शिकायतों को आधार बनाकर शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की और शिक्षक द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों को सत्यापन के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी भेजा गया।

विश्वविद्यालय की जांच में फर्जी निकली डिग्री

विश्वविद्यालय से जब सत्यापन रिपोर्ट वापस आई, तो सारा सच सामने आ गया। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार, सत्य प्रकाश मिश्र द्वारा प्रस्तुत की गई डिग्री पूरी तरह फर्जी पाई गई। उनके द्वारा जमा किए गए शैक्षणिक अभिलेख विश्वविद्यालय के मूल रिकॉर्ड से किसी भी तरह मेल नहीं खा रहे थे। यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षक ने नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी का सहारा लिया था।

नोटिस को नजरअंदाज करना पड़ा महंगा

विश्वविद्यालय से फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद अमेठी के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) संजय तिवारी ने आरोपी शिक्षक को अपनी बात रखने और बेगुनाही साबित करने के कई अवसर प्रदान किए। विभाग की ओर से साल 2025 और 2026 के दौरान शिक्षक को कई बार 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए गए। उनसे कहा गया कि वे अपने मूल दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें। हालांकि, शिक्षक ने न तो कोई प्रामाणिक दस्तावेज पेश किया और न ही किसी नोटिस का संतोषजनक जवाब दिया। वे लगातार इस मामले को टालते रहे, जिससे उनका अपराध और अधिक स्पष्ट होता गया।

वेतन की रिकवरी और एफआईआर के सख्त निर्देश

आरोपी शिक्षक के लगातार टालमटोल वाले रवैये और विश्वविद्यालय की पुख्ता रिपोर्ट को देखते हुए बीएसए संजय तिवारी ने इस नियुक्ति को पूरी तरह अवैध करार दिया। उन्होंने सत्य प्रकाश मिश्र की बर्खास्तगी का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इसके अलावा, विभाग ने कड़ी कार्रवाई के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  • संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) जामो को निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी देरी के आरोपी के खिलाफ स्थानीय थाने में धोखाधड़ी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराएं।
  • पिछले 10 वर्षों के दौरान शिक्षक के रूप में लिए गए पूरे वेतन और सभी सरकारी भत्तों की पाई-पाई सरकारी खजाने में वापस जमा कराने के लिए रिकवरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

इस पूरी घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन अब विभाग का दावा है कि ऐसे फर्जी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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