गाजा और फिलिस्तीन के बहाने सरकार पर हमला
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लेख लिखकर केंद्र सरकार की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने मुख्य रूप से गाजा और फिलिस्तीन में जारी संकट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। सोनिया गांधी ने दावा किया है कि संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की जून 2026 की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि इजरायल गाजा में फिलिस्तीनी आबादी, विशेषकर बच्चों को खत्म करने की योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की इस विषय पर चुप्पी को पूरी तरह से अनुचित और अनैतिक करार दिया है।
भयावह आंकड़े और सोनिया गांधी के दावे
अपने लेख में सोनिया गांधी ने मानवीय त्रासदी को रेखांकित करने के लिए कई गंभीर आंकड़े पेश किए हैं। उनका दावा है कि गाजा में अब तक 20 हजार से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार बच्चे घायल हुए हैं। उन्होंने लिखा है कि गाजा में मारे गए या जख्मी हुए लोगों में 27 प्रतिशत हिस्सा बच्चों का है। इसके अलावा, सोनिया गांधी ने यह भी उल्लेख किया है कि गाजा के 97 प्रतिशत स्कूल पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को फिलिस्तीनी जनता के पक्ष में खुलकर आवाज उठानी चाहिए और पश्चिमी तट तथा गाजा की स्थिति पर एक स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। इससे पहले, उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की इजरायली हमले में हुई मौत पर भी भारत सरकार के मौन पर सवाल उठाए थे।
सेलेक्टिव आउटरेज का लगा आरोप
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले दो वर्षों में सोनिया गांधी द्वारा लिखे गए सात लेखों में से तीन का संबंध गाजा और ईरान से रहा है। आलोचकों ने इसे 'सेलेक्टिव आउटरेज' यानी चुनिंदा आक्रोश करार दिया है। आरोप है कि कांग्रेस केवल उन्हीं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को उठाती है जो उनके राजनीतिक विमर्श के अनुकूल होते हैं, जबकि अन्य गंभीर मानवीय संकटों पर पार्टी खामोशी साध लेती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोनिया गांधी का लेख भारत सरकार की उस नीति को नजरअंदाज करता है जो बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है।
भारत की संतुलित विदेश नीति
भारत सरकार ने गाजा और इजरायल संघर्ष को लेकर हमेशा शांति और संवाद का रास्ता अपनाने की वकालत की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न वैश्विक मंचों से रूस-यूक्रेन संघर्ष हो या गाजा का संकट, हर बार युद्ध को टालने और सामूहिक विकास के साथ सह-अस्तित्व पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय ने भी यह स्पष्ट किया है कि भारत की नीति 'सभी के साथ जुड़ाव' की रणनीतिक संतुलन पर टिकी है। भारत इजरायल के साथ अपने मजबूत रणनीतिक संबंधों को बरकरार रखते हुए फिलिस्तीन को मानवीय सहायता देने और एक स्वतंत्र एवं संप्रभु फिलिस्तीन राज्य के निर्माण का समर्थन करने में विश्वास रखता है। गौरतलब है कि ईरान ने भी क्षेत्रीय शांति के लिए भारत की भूमिका और प्रधानमंत्री मोदी की आवाज को महत्वपूर्ण बताया है।
बांग्लादेशी हिंदुओं की उपेक्षा का मुद्दा
सोनिया गांधी और कांग्रेस के इस 'सेलेक्टिव आउटरेज' पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुए अत्याचारों पर चुप क्यों हैं। करीब दो साल पहले बांग्लादेश में छात्रों के आंदोलन की आड़ में हिंदुओं पर जो जुल्म ढाए गए, वे किसी से छिपे नहीं हैं। वहाँ मॉब लिंचिंग, घरों व दुकानों में आगजनी और ईशनिंदा के फर्जी मामलों में हिंदुओं की गिरफ्तारी के ढेरों उदाहरण सामने आए थे। वर्तमान तारिक रहमान सरकार के दौर में भी हिंसा का वह सिलसिला थमा नहीं है।
आलोचकों का तर्क है कि जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय अस्तित्व के संकट से जूझ रहा था, तब सोनिया गांधी ने न तो कोई लेख लिखा और न ही कोई आधिकारिक बयान जारी किया। यही रवैया नेपाल के संदर्भ में भी देखने को मिला, जहाँ कांग्रेस ने मोदी सरकार की उन नीतियों की आलोचना की, जो वास्तव में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के सिद्धांत और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही हैं। कांग्रेस का यह दोहरा मापदंड अब जनता के बीच बहस का विषय बन गया है।
निष्कर्ष
एक तरफ सोनिया गांधी वैश्विक मुद्दों पर मानवीय आधार का हवाला देकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर उन पर अपने ही पड़ोसी देशों में हिंदुओं के उत्पीड़न को लेकर उदासीनता बरतने का आरोप लग रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह सब केवल वोट बैंक की राजनीति को साधने का प्रयास है, जो भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित करने के बजाय सरकार को घेरने के लिए किया जा रहा है।
https://hindi.news18.com/news/nation/sonia-gandhi-vote-bank-politics-article-on-gaza-iran-congress-face-accusations-of-selective-outrage-10608412.html